कुरान - 3:128 सूरह आल-इमरान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

128
لَيۡسَ لَكَ مِنَ ٱلۡأَمۡرِ شَيۡءٌ أَوۡ يَتُوبَ عَلَيۡهِمۡ أَوۡ يُعَذِّبَهُمۡ فَإِنَّهُمۡ ظَٰلِمُونَ

Transliteration: (Laisa laka minal amrishai'un aw yatooba 'alaihim aw yu'az zi bahum fa innahum zaalimoon)

(ऐ नबी!) इस मुआमले में आपका कोई इख़्तियार नहीं, चाहे वह उनकी तौबा क़बूल फ़रमाए या उन्हें अज़ाब दे, क्योंकि वे ज़ालिम हैं। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह आल-इमरान आयत 128 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह आले इमरान - आयत 128

✅ मुतलक़ इख़्तियारे इलाही

ओहद में जब नबी करीम (सल्ल.) के दंदाने मुबारक शहीद हुए तो आपने फ़रमाया कि वे कैसे फ़लाह पाएंगे; इस पर अल्लाह ने फ़रमाया कि हिदायत व सज़ा का मुतलक़ इख़्तियार अल्लाह ही के हाथ में है (और बाद में उनमें से कई इस्लाम लाए)।

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