Transliteration: (Qad kaana lakum Aayatun fee fi'atainil taqataa fi'atun tuqaatilu fee sabeelil laahi wa ukhraa kaafiratuny yarawnahum mislaihim ra' yal 'ayn; wallaahu yu'ayyidu bi nasrihee mai yashaaa'; innaa fee zaalika la 'ibratal li ulil absaar)
✅ [22] बदर की लड़ाई एक इलाही निशानी
यह आयत उस लड़ाई की ओर इशारा करती है जो रमजान के महीने में, 2 हिज्री में, शुक्रवार को लड़ी गई थी। यह इस्लामी इतिहास की शुरुआती और निर्णायक लड़ाइयों में से एक थी। मुसलमानों की संख्या केवल 313 थी, जिनके पास बहुत सीमित संसाधन थे:
✅ [23] काफ़िरों की ताक़त उन्हें बचा नहीं सकी
क़ुरैश की सेना, जिसका नेतृत्व उतबा बिन रबिआह कर रहे थे, लगभग 950 सैनिकों की थी, जिनके पास:
✅ [24] दृष्टि में चमत्कार: दोगुनी संख्या का प्रभाव
अल्लाह ने उस लड़ाई के दौरान हुए एक चमत्कार का ज़िक्र किया है:
काफ़िरों ने मुसलमानों को अपनी आँखों से उनके वास्तविक संख्या से दोगुना देखा।
इस धारणा ने क़ुरैश के मन में भय और हताशा उत्पन्न की, जबकि वास्तव में मुसलमान कम थे। यह इलाही हस्तक्षेप था जो विश्वासियों को बढ़त देने के लिए हुआ।
✅ [25] जीत का असली स्रोत: ईमान और इलाही सहायता
इस आयत से हम समझते हैं कि:
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