कुरान - 3:14 सूरह आल-इमरान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

14
زُيِّنَ لِلنَّاسِ حُبُّ ٱلشَّهَوَٰتِ مِنَ ٱلنِّسَآءِ وَٱلۡبَنِينَ وَٱلۡقَنَٰطِيرِ ٱلۡمُقَنطَرَةِ مِنَ ٱلذَّهَبِ وَٱلۡفِضَّةِ وَٱلۡخَيۡلِ ٱلۡمُسَوَّمَةِ وَٱلۡأَنۡعَٰمِ وَٱلۡحَرۡثِۗ ذَٰلِكَ مَتَٰعُ ٱلۡحَيَوٰةِ ٱلدُّنۡيَاۖ وَٱللَّهُ عِندَهُۥ حُسۡنُ ٱلۡمَـَٔابِ

Transliteration: (Zuyyina linnaasi hubbush shahawaati minannisaaa'i wal baneena walqanaateeril muqantarati minaz zahabi walfiddati walkhailil musawwamati wal an'aami walhars; zaalika mataa'ul hayaatid dunyaa wallaahu 'indahoo husnul ma-aab)

14. लोगों के लिए महिलाओं और बच्चों की चाहतें, और सोने-चांदी का जमावड़ा, खूबसूरत निशान वाले घोड़े, मवेशी और फसलें आकर्षक बनाई गई हैं। ये सब दुनिया के जीवन की ज़रूरतें हैं [27]। और सबसे अच्छा ठिकाना तो अल्लाह के पास है [28]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह आल-इमरान आयत 14 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

✅ [26] सांसारिक लालसाएँ और उनकी फंदेबाज़ी
यह आयत दिखाती है कि शैतान किस तरह काफ़िरों को महिलाओं, बच्चों, दौलत और सामान की सांसारिक लालसाओं के माध्यम से बहकाता है। ये लालसाएँ गैर-विश्वासियों के दिलों को फँसाती हैं और उन्हें आख़िरत से बेपरवाह कर देती हैं।
लेकिन सच्चा मोमिन इन दुनियावी आशीर्वादों को ईमान की नजर से देखता है और केवल अल्लाह की खुशी के लिए चाहता है — जैसे कि धार्मिक फ़र्ज़ों या सुन्नतों को पूरा करने के लिए।

✅ [27] जब सांसारिक चीजें धर्म के काम आती हैं तो उनकी अहमियत बढ़ जाती है
सोना, चाँदी, मवेशी, परिवार, और फसलें— ये सब या तो:

  • व्यक्तिगत सुख या रुतबे के लिए सीमित सांसारिक सामान हैं,
  • या इस्लाम की सेवा में उपयोग करने पर नायक बन जाते हैं।

उदाहरण के लिए:

  • धर्म की रक्षा में उपयोग किया गया घोड़ा,
  • दान में खर्च की गई दौलत,
  • पैगंबर ﷺ की सुन्नत के अनुसार अपने परिवार का ख्याल रखना।

ऐसे इस्तेमाल से सांसारिक चीज़ें इबादत के काम बन जाती हैं। अकेले ये दुनिया बिलकुल शून्य है, लेकिन जब इसे ईमान से जोड़ा जाता है, तो यह कई गुना लाभदायक हो जाती है, जैसे हजरत उस्मान-ए-गनी (रजि.) की दौलत बनी।

✅ [28] सबसे अच्छा ठिकाना केवल अल्लाह के पास है
सबसे अच्छा आवास इस अस्थायी दुनिया में नहीं है — वह अल्लाह के पास है, यानी जन्नत, जहाँ हमेशा की खुशी, इनाम और सुकून है।
यह आयत उन लोगों को चेतावनी देती है जो अंधाधुंध सांसारिक चीज़ों के पीछे भागते हैं, और मोमिनों को प्रेरित करती है कि वे सांसारिक आशीर्वादों को आख़िरत की प्राप्ति के साधन समझें।
आगामी आयत इस दुनिया की चमक-दमक और सच्ची कामयाबी के बीच के फर्क को और स्पष्ट करेगी।

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