Transliteration: (Qul lillazeena kafaroosatughlaboona wa tuhsharoona ilaa jahannam; wa bi'sal mihaad)
✅ [20] मदीना के घमंडी यहूदियों के लिए एक इलाही चेतावनी
यह आयत बदर की लड़ाई के बाद नाज़िल हुई थी। मदीना के यहूद ने गर्व और ताने मारते हुए कहा था कि क़ुरैश मक्काह की हार उनकी कमज़ोर सेना की वजह से हुई है। उन्होंने चुनौती दी थी कि अगर मुसलमान उनसे लड़ने की हिम्मत करें तो वे असली जंग लड़ना सिखाएंगे।
अल्लाह ने इस गर्व का खंडन करते हुए यह आयत भेजी, जो उनकी हार की भविष्यवाणी भी थी।
✅ [21] हार और इलाही न्याय की पूर्ति की भविष्यवाणी
यह आयत काफ़िरों के लिए चेतावनी है और मुसलमानों के लिए खुशखबरी भी। अल्लाह के فضل से यह भविष्यवाणी जल्द ही पूरी हुई:
ये सब "हराए जाने" के रूप हैं, जैसा कि आयत में बताया गया है।
साथ ही, इस आयत में यह भी स्पष्ट किया गया है कि अंत में इन काफ़िरों की सज़ा जहन्नम होगी, जो सबसे भयानक और बुरी जगह है। उनका इंकार और इलाही हक़ से बग़ावत उनका अंत निर्धारित करेगी।
ध्यान देने वाली बात यह है कि गैर-मुसलमान इस दुनिया में इस्लामी शरियत के नियमों के दायरे में नहीं आते, परंतु अल्लाह की नज़रों में वे इलाही हक़ से इंकार करने के लिए जवाबदेह हैं। इसलिए इस आयत में उनके गुनाहों और सज़ा की चेतावनी भी दी गई है।
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