कुरान - 3:10 सूरह आल-इमरान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

10
إِنَّ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ لَن تُغۡنِيَ عَنۡهُمۡ أَمۡوَٰلُهُمۡ وَلَآ أَوۡلَٰدُهُم مِّنَ ٱللَّهِ شَيۡـٔٗاۖ وَأُوْلَـٰٓئِكَ هُمۡ وَقُودُ ٱلنَّارِ

Transliteration: (Innal lazeena kafaroo lan tughniya 'anhum amwaaluhum wa laaa awlaaduhum minal laahi shai'anw wa ulaaa'ika hum waqoodun Naar)

10. निःसंदेह, जिन्होंने कुफ्र (अविश्वास) किया — न तो उनकी दौलत और न ही उनकी संतानें [18] अल्लाह (के अज़ाब) के मुक़ाबले उनके कुछ काम आएँगी, और वे ही लोग आग (जहन्नम) का ईंधन बनेंगे। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह आल-इमरान आयत 10 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

✅ [18] दौलत और औलाद केवल ईमान वालों को लाभ देती है, काफ़िरों को नहीं
इस आयत में यह स्पष्ट कर दिया गया है कि काफ़िरों की दौलत और उनकी संतानें उन्हें अल्लाह के अज़ाब से नहीं बचा सकेंगी।
🔸 इससे विपरीत बात भी समझ में आती है:

  • एक मोमिन (ईमान वाला) यदि अपनी दौलत को सही मार्ग में खर्च करता है (जैसे: सदक़ा, ज़कात आदि), और उसकी औलाद नेक होती है — तो यही चीज़ें क़ियामत के दिन उसके लिए रहमत और सिफ़ारिश का ज़रिया बन सकती हैं।
  • औलाद की दुआएं, और जारी रहने वाला सदक़ा (सदक़ा-ए-जारीया) एक मोमिन को मरने के बाद भी फ़ायदा पहुँचाते हैं।

🟥 लेकिन:
काफ़िर के लिए यही दौलत और औलाद एक बोझ बन जाते हैं, क्योंकि उसने इन्हें अल्लाह की नाफ़रमानी में इस्तेमाल किया होता है।

  • ऐसे लोग जहन्नम का ईंधन बनेंगे — यानी उनकी सज़ा को और बढ़ाने का कारण वही चीज़ें बनेंगी, जिन पर उन्हें गर्व था।

✅ अल्लाह के फ़ज़ल और रहमत से, मोमिनों की दुनिया की नेमतें (औलाद, माल) आखिरत में भी फ़ायदा देती हैं — मगर काफ़िरों के लिए यही नेमतें सज़ा का ज़रिया बन जाती हैं।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now