कुरान - 3:157 सूरह आल-इमरान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

157
وَلَئِن قُتِلۡتُمۡ فِي سَبِيلِ ٱللَّهِ أَوۡ مُتُّمۡ لَمَغۡفِرَةٞ مِّنَ ٱللَّهِ وَرَحۡمَةٌ خَيۡرٞ مِّمَّا يَجۡمَعُونَ

Transliteration: (Wa la'in qutiltum fee sabeelil laahi aw muttum lamaghfiratum minal laahi wa rahmatun khairum mimmaa yajma'oon)

और यदि तुम अल्लाह की राह में मारे जाओ या मर जाओ [354], तो अल्लाह की बख़्शिश और रहमत उस सब से बेहतर है जिसे वे जमा करते हैं [355]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह आल-इमरान आयत 157 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा आले-इमरान – आयत 157 की तफ़्सीर

 

✅ [354] अल्लाह की राह में मरना क्या है?

अल्लाह की राह में मरने का मतलब है उस वक्त मौत आना जब इंसान अल्लाह के काम में लगा हो।
इसमें शामिल हैं:

  • अल्लाह का ज़िक्र करते हुए मरना
  • इबादत की हालत में मरना
  • दीन के किसी इल्मी या खिदमत के काम में लगे रहना
    ऐसी मौतें अल्लाह की राह में शहीद होने जैसी होती हैं, और इसके नतीजे में बंदे को अल्लाह की बख़्शिश और रहमत मिलती है।

✅ [355] उनकी जमा की गई दौलत से कहीं बेहतर

यहाँ "बेहतर" से मुराद यह है कि अल्लाह की राह में शहादत या उसकी रहमत और बख़्शिश,
उन सारी चीज़ों से बेहतर है जो काफ़िर लोग दुनिया में जमा करते हैं।
असल में दुनियावी माल और दौलत की कोई असली अहमियत नहीं,
लेकिन काफ़िर उसे बहुत कीमती समझते हैं।
शहादत और अल्लाह की रहमत वह चीज़ है जो उनके तमाम ख़ज़ानों से लाख गुना बेहतर है।

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