कुरान - 3:176 सूरह आल-इमरान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

176
وَلَا يَحۡزُنكَ ٱلَّذِينَ يُسَٰرِعُونَ فِي ٱلۡكُفۡرِۚ إِنَّهُمۡ لَن يَضُرُّواْ ٱللَّهَ شَيۡـٔٗاۚ يُرِيدُ ٱللَّهُ أَلَّا يَجۡعَلَ لَهُمۡ حَظّٗا فِي ٱلۡأٓخِرَةِۖ وَلَهُمۡ عَذَابٌ عَظِيمٌ

अनुवाद -

यह तो बस शैतान ही है जो तुम्हें अपने साथियों से डराता है। तो उनसे मत डरो, बल्कि मुझसे डरो अगर तुम सच्चे ईमान वाले हो।

सूरह आल-इमरान आयत 176 तफ़सीर


📖 सूरा आले-इमरान – आयत 175 की तफ़्सीर

 

✅ [395] शैतान और उसके साथी डर फैलाते हैं

यह आयत बताती है कि डर फैलाने वाला असल में शैतान है, और वह अपने साथियों — यानी मुनाफ़िक़ों और काफ़िरों — के ज़रिए डराता है।

इससे हम ये बातें सीखते हैं:

  • जो शख़्स शैतान की राह पर चलता है, वह खुद भी शैतान की तरह बन जाता है।
  • ऐसे लोगों की बातों में आने वाला भी शैतान का साथी बनता है।
  • सच्चे मोमिन को जिन्न और इंसानी शैतानों दोनों से होशियार रहना चाहिए।
  • शैतान का सबसे बड़ा हथियार 'डर और भ्रम' है, जो वह दिलों में बैठा देता है।
  • मज़बूत ईमान वाला इंसान इन भ्रमों से नहीं डगमगाता, बल्कि अल्लाह पर यक़ीन रखता है।

✅ [396] सच्चे मोमिन सिर्फ अल्लाह से डरते हैं

यह आयत क़ियामत तक के सभी मुसलमानों के लिए एक सबक और हौसला है

यह बताती है कि:

  • अगर मुसलमानों के दिलों में अल्लाह का खौफ हो, तो कोई काफ़िर या मुनाफ़िक़ उन्हें नुकसान नहीं पहुँचा सकता।
  • जो अल्लाह से डरता है, दुनिया उससे डरती है, लेकिन वह दुनिया से नहीं डरता।
  • अल्लाह का डर ताक़त देता है, जबकि मख़्लूक़ का डर कमज़ोर बना देता है।

हुक्म साफ़ है:
👉 "मुझसे डरो" — यानी सिर्फ अल्लाह से,
👉 अगर तुम सच्चे मोमिन हो।

अल्लाह का खौफ ही ईमान की बुनियाद और कामयाबी की कुंजी है।

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