कुरान - 3:177 सूरह आल-इमरान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

177
إِنَّ ٱلَّذِينَ ٱشۡتَرَوُاْ ٱلۡكُفۡرَ بِٱلۡإِيمَٰنِ لَن يَضُرُّواْ ٱللَّهَ شَيۡـٔٗاۖ وَلَهُمۡ عَذَابٌ أَلِيمٞ

Transliteration: (Innal lazeenash tarawul kufra bil eemaani lai yadurrul laaha shai'anw wa lahum 'azaabun aleem)

जिन्होंने ईमान के बदले कुफ़्र को ख़रीदा, वे अल्लाह को कुछ भी नुकसान नहीं पहुँचा सकते, और उनके लिए दर्दनाक अज़ाब है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह आल-इमरान आयत 177 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा आले-इमरान – आयत 177 की तफ़्सीर

 

✅ [400] ईमान बेचकर कुफ़्र ख़रीदने वाले

"ईमान के बदले कुफ़्र ख़रीदने" का मतलब दो तरह के लोगों से है:

  • मुरतद — जो पहले मुसलमान थे, लेकिन बाद में जानबूझकर इस्लाम छोड़ दिया और कुफ़्र अपना लिया।
  • पक्के काफ़िर या मुनाफ़िक़ — जिनके पास ईमान लाने का मौक़ा और समझ थी, फिर भी उन्होंने जान-बूझकर इनकार कर दिया।

ये दोनों ही लोग हक़ को पहचानने के बावजूद कुफ़्र को तरजीह देते हैं।

मगर इस आयत में साफ़ बताया गया कि:

  • ऐसे लोग अल्लाह या उसके दीन को ज़रा भी नुकसान नहीं पहुँचा सकते।
  • उनका इनकार सिर्फ़ उनके अपने लिए नुक़सानदेह है।
  • उनका अंजाम आख़िरत में दर्दनाक और ज़लील करने वाला अज़ाब होगा।

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