Transliteration: (Fanqalaboo bini'matim minal laahi wa fadlil lam yamsashum sooo'unw wattaba'oo ridwaanal laah; wallaahu zoo fadlin 'azeem)
जब सहाबा कराम मैदान-ए-जंग में पहुँचे और देखा कि अबू सुफ़यान की फौज आई ही नहीं, तो वे सू़क़ बिन कनानाह नामक बाज़ार में गए। वहाँ उन्होंने सौदा-बाज़ारी की और अच्छा मुनाफ़ा कमाया। फिर मदीना वापस लौटे, न केवल दुनियावी फ़ायदा लेकर बल्कि अल्लाह की रज़ामंदी भी हासिल की।
इस सफ़र को "जैशुस-स़वीक़" (फ़ायदे वाला लश्कर) कहा गया। लोग कहने लगे:
इन सहाबा ने ना कोई तकलीफ़ झेली, ना दुश्मन से मुकाबला हुआ, और फिर भी मुनाफ़ा और सवाब दोनों ले आए।
इससे कुछ अहम बातें साबित होती हैं:
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