कुरान - 3:181 सूरह आल-इमरान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

181
لَّقَدۡ سَمِعَ ٱللَّهُ قَوۡلَ ٱلَّذِينَ قَالُوٓاْ إِنَّ ٱللَّهَ فَقِيرٞ وَنَحۡنُ أَغۡنِيَآءُۘ سَنَكۡتُبُ مَا قَالُواْ وَقَتۡلَهُمُ ٱلۡأَنۢبِيَآءَ بِغَيۡرِ حَقّٖ وَنَقُولُ ذُوقُواْ عَذَابَ ٱلۡحَرِيقِ

Transliteration: (Laqad sami'al laahu qawlal lazeena qaalooo innal laaha faqeerunw wa nahnu aghniyaaa'; sanaktubu maa qaaloo wa qatlahumul Ambiyaa'a bighairi haqqinw wa naqoolu zooqoo 'azaabal Hareeq)

जिन्हें अल्लाह ने अपने फज़्ल से जो कुछ दिया है उसमें बुख़्ल करने वाले ये न समझें कि यह उनके लिए अच्छा है; बल्कि यह उनके लिए बुरा है। क़ियामत के दिन वही चीज़ उनके गले का तौक़ बन जाएगी जिससे उन्होंने बुख़्ल किया था [408]। और आसमानों और ज़मीन की विरासत अल्लाह ही के लिए है [409], और अल्लाह तुम्हारे सब कामों से ख़बर रखता है [411]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह आल-इमरान आयत 181 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा आले-इमरान – आयत [180] की तफ़्सीर

 

✅ [408] बुख़्ल करने वाले और उनके ज़िम्मेदारियाँ छोड़ना

बुख़्ल का मतलब सिर्फ़ माल छुपाने से नहीं, बल्कि हर वो हक़ अदा न करना है जो इंसानों, रिश्तेदारों या अल्लाह का है। चाहे वो ज़कात हो, माँ-बाप का ख़र्च हो, या किसी यतीम का हक़ — जो इनसे बचता है, वो इसी आयत के लायक है।

✅ [409] माल, इल्म और ताक़त में भी बुख़्ल

यहाँ "जो कुछ अल्लाह ने दिया" कहा गया है, जो सिर्फ़ माल तक सीमित नहीं — इसमें इल्म, पद, ताक़त वग़ैरह सब शामिल हैं। ये सब अल्लाह की अमानतें हैं; अगर इन्हें दूसरों से छुपाया जाए, तो यह ख़यानत कहलाती है।

✅ [410] माल साँप बन जाएगा

हदीस के मुताबिक जो ज़कात नहीं देता, उसका माल क़ियामत के दिन एक ज़हरीले साँप की शक्ल में उसके गले में लिपट जाएगा और कहेगा: "मैं हूँ तेरा माल, जिससे तू ज़कात नहीं देता था।" यही बात इस आयत में गले के तौक़ के रूप में कही गई है — यह रुसवाई और अजाब का निशान होगा।

✅ [411] नेमतें भी अजाब बन सकती हैं

अगर कोई गुनाहों के बावजूद अल्लाह की नेमतें पा रहा है, तो ये ज़रूरी नहीं कि यह रज़ा हो — यह इमतिहान या अजाब भी हो सकता है। उल्टा, अगर गुनाह पर तुरंत सज़ा मिलती है, तो वह रहमत होती है ताकि इंसान तौबा करे। अल्लाह हर नियत और हर अमल को जानता है।

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