कुरान - 3:183 सूरह आल-इमरान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

183
ٱلَّذِينَ قَالُوٓاْ إِنَّ ٱللَّهَ عَهِدَ إِلَيۡنَآ أَلَّا نُؤۡمِنَ لِرَسُولٍ حَتَّىٰ يَأۡتِيَنَا بِقُرۡبَانٖ تَأۡكُلُهُ ٱلنَّارُۗ قُلۡ قَدۡ جَآءَكُمۡ رُسُلٞ مِّن قَبۡلِي بِٱلۡبَيِّنَٰتِ وَبِٱلَّذِي قُلۡتُمۡ فَلِمَ قَتَلۡتُمُوهُمۡ إِن كُنتُمۡ صَٰدِقِينَ

Transliteration: (Allazeena qaalooo innal laaha 'ahida ilainaaa allaa nu'mina liRasoolin hatta ya'tiyanaa biqurbaanin ta kuluhun naar; qul qad jaaa'akum Rusulum min qablee bilbaiyinaati wa billazee qultum falima qataltumoohum in kuntum saadiqeen)

जो कहते हैं: “अल्लाह ने हमें वादा दिया है कि हम किसी रसूल पर ईमान नहीं लाएँगे जब तक वह हमारे पास कोई ऐसी क़ुर्बानी न लाए जिसे आग खा जाए [415]।” आप फ़रमा दीजिए: “मुझसे पहले तुम तक कई रसूल वाज़ेह निशानियों के साथ आए [416] और वही चीज़ लेकर आए जिसका तुम ज़िक्र कर रहे हो [417], फिर अगर तुम सच्चे हो तो तुमने उन्हें क्यों क़त्ल किया?” [418] (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह आल-इमरान आयत 183 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा आले-इमरान – आयत [183] की तफ़्सीर

 

✅ [415] यहूदियों की शर्त और नाज़िल होने का कारण

यहूदियों ने गुरूर से कहा कि उन्हें तौरात में हुक्म दिया गया है कि जब तक कोई रसूल आसमान से आग द्वारा खाई जाने वाली क़ुर्बानी न दिखाए, वो ईमान नहीं लाएँगे। उन्होंने हुज़ूर ﷺ से कहा कि चूँकि आपने यह मोजिज़ा नहीं दिखाया, इसलिए हम ईमान नहीं ला सकते। इस आयत के ज़रिये अल्लाह ने इस बहाने को रद्द कर दिया, क्योंकि यह शर्त हर रसूल पर लागू नहीं थी।

✅ [416] पहले रसूल और वाज़ेह निशानियाँ

आगे जवाब दिया गया कि “तुमसे पहले कई रसूल वाज़ेह निशानियों के साथ आए” — यानी हर नबी कोई न कोई मोजिज़ा लेकर आया, भले ही वह क़ुर्बानी वाली आग न हो। मगर इसके बावजूद यहूदियों ने उन्हें झुठलाया और उन्हें तकलीफ़ दी। इससे साबित होता है कि उनका यह दावा सच्चे ईमान के लिए नहीं था, बल्कि सिर्फ़ बहाना था।

✅ [417] मांगी गई निशानी भी दिखी थी

कुछ रसूलों, जैसे हज़रत ज़करिय्या और हज़रत यहया (अलैहिस्सलाम), ने वाक़ई ऐसी क़ुर्बानी पेश की जिसे आग ने खा लिया, फिर भी यहूदियों ने उन्हें क़त्ल कर डाला। इससे उनकी मुनाफ़िक़त ज़ाहिर हो गई — माँगी गई निशानी मिलने के बावजूद उन्होंने इनकार किया।

✅ [418] यहूदियों की मुनाफ़िक़त का पर्दाफ़ाश

आयत में फिर उन्हें चैलेंज किया गया: “अगर तुम अपने दावे में सच्चे हो, तो फिर तुमने उन्हें क्यों क़त्ल किया?” इससे साबित हुआ कि उनका ये तर्क महज़ हठधर्मी था। भले ही क़त्ल उनके बाप-दादाओं ने किया हो, लेकिन ये लोग उनकी ताईद और हिमायत करके उसी जुर्म में शरीक हैं।

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