कुरान - 3:29 सूरह आल-इमरान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

29
قُلۡ إِن تُخۡفُواْ مَا فِي صُدُورِكُمۡ أَوۡ تُبۡدُوهُ يَعۡلَمۡهُ ٱللَّهُۗ وَيَعۡلَمُ مَا فِي ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَمَا فِي ٱلۡأَرۡضِۗ وَٱللَّهُ عَلَىٰ كُلِّ شَيۡءٖ قَدِيرٞ

Transliteration: (Qul in tukhfoo maa fee sudoorikum aw tubdoohu ya'lamhul laah; wa ya'lamu maa fis samaawaati wa maa fil ard; wallaahu 'alaa kulli shai'in Qadeer)

29. "कहो (हे प्यारे पैगंबर): 'चाहे तुम अपने दिलों में जो छुपाते हो उसे छुपाओ या जाहिर करो, अल्लाह उसे जानता है। जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है वह भी वह जानता है [65]। अल्लाह हर चीज़ पर क़ादिर है।'" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह आल-इमरान आयत 29 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

[65] "अल्लाह की पूरी और हमेशा से मौजूद जानकारी" — दिलों और करमात की नज़र

👉 अल्लाह हर बात से बेख़बर नहीं है, न ही कभी था।
👉 वह दिलों के अंदर छुपी हर बात, चाहे वो कोई ख़्याल हो या कोई भावना, उसे पूरी तरह जानता है।
👉 न सिर्फ़ ज़मीन पर जो होता है, बल्कि आसमानों में भी जो है, सब उसकी निगरानी में है।
👉 यहां “जानना” का मतलब यह नहीं कि पहले अल्लाह को पता नहीं था, बल्कि हर बात उसके लिए साफ़ और स्पष्ट है।
👉 कोई भी काम, छुपा हो या खुला, अल्लाह उसकी पूरी जानकारी रखता है।

सबक़:
हम जो कुछ भी दिल में रखते हैं या बाहर दिखाते हैं, वह सब अल्लाह के सामने है। इसलिए हमें ईमानदारी और सच्चाई के साथ रहना चाहिए, क्योंकि कोई भी चीज़ अल्लाह से छुपी नहीं रह सकती।

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