Transliteration: (Toolijul laila fin nahaari wa toolijun nahaara fil laili wa tukhrijul haiya minalmaiyiti wa tukhrijul maiyita minal haiyi wa tarzuqu man tashaaa'u bighari hisaab)
👉 अल्लाह कुदरत के ज़रिए दिन और रात को बदलता रहता है।
👉 जैसे सर्दियों में दिन कम और रात ज़्यादा होती है, गर्मियों में रात कम और दिन ज़्यादा होता है।
👉 यह तबीअती बदलाव अल्लाह की मर्ज़ी से होते हैं।
👉 दीन के नज़रिया से भी, मुसलमानों का राज़ गैर-मुसलमानों पर दिन के उजाले की तरह है, और गैर-मुसलमानों की हुकूमत मुसलमानों पर रात के अंधेरे जैसी।
👉 अल्लाह ज़िंदगी और मौत दोनों की मालिक है।
👉 जैसे इंसान को मरे हुए कोशिकाओं (dead cells) से जीवन मिलता है, वैसे ही मौत भी ज़िंदगी से आती है।
👉 ये केवल शारीरिक पैदा होने की बात नहीं, बल्कि दिल और रूह की ज़िंदगी-मौत भी हैं।
👉 अल्लाह जो चाहे, उसमें से नफ़्सान और जन्नत व जहन्नम का रास्ता बनाता है।
👉 अल्लाह अपने बंदों को बिना किसी हिसाब किताब के देता है।
👉 इसका मतलब है कि वह या तो इतना देता है कि गिनती नहीं हो सकती, या ऐसे देता है जो किसी की उम्मीद से बाहर हो।
👉 जैसा कि कुरान में भी है कि अल्लाह किसी को ऐसी जगह से रज़ाक़ देता है जिसकी उन्हें उम्मीद नहीं होती।
सबक़:
अल्लाह की ताक़त और मर्ज़ी हर चीज़ पर हावी है — दिन-रात, ज़िंदगी-मौत, रज़ाक़त — सब उसी के हाथ में है। इंसान को अल्लाह पर पूरा भरोसा रखना चाहिए।
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