Transliteration: (Fakaifa izaa jama'naahum li Yawmil laa raiba fee wa wuffiyat kullu nafsim maa kasabat wa hum laa yuzlamoon)
👉 इस आयत में आख़िरत के दिन के न्याय का ज़िक्र है।
⚠️ साथ ही, अल्लाह की रहमत से अच्छे कामों को बढ़ा भी दिया जा सकता है, और गुनाहों को माफ़ या कम भी किया जा सकता है।
📌 सबक़:
अल्लाह का न्याय बिल्कुल सही और पूरा है, मगर वह बहुत ही दयालु और रहम करने वाला भी है।
इसलिए इंसान को हमेशा अच्छा करने की कोशिश करनी चाहिए और अपने गुनाहों से तौबा (पश्चाताप) करनी चाहिए।
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