23. "क्या तुमने नहीं देखा (ऐ मुहम्मद ﷺ) उन लोगों को जिन्हें किताब का एक हिस्सा दिया गया था? उन्हें अल्लाह की किताब की तरफ़ बुलाया जाता है [50] ताकि वो उनके बीच फ़ैसला करे, लेकिन उनमें से एक गिरोह मुँह फेर लेता है और (मानने से) इनकार कर देता है।"
👉 इस हिस्से में बताया गया कि यहूदियों को अल्लाह की किताब — यानी तौरात की तरफ़ बुलाया गया, ताकि उसके हुक्म से उनके आपसी झगड़े का फ़ैसला किया जाए।
लेकिन उन्होंने उस दावत को क़ुबूल नहीं किया, क्योंकि:
एक और वाक़िआ ये था कि:
📌 सबक़: जो लोग दीन के हुक्म को छिपाते हैं या बदलते हैं, वो सच्चाई से भागते हैं। अल्लाह का हुक्म हर हाल में मानना ज़रूरी है।
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सूरह आल-इमरान आयत 23 तफ़सीर