कुरान - 3:22 सूरह आल-इमरान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

22
أُوْلَـٰٓئِكَ ٱلَّذِينَ حَبِطَتۡ أَعۡمَٰلُهُمۡ فِي ٱلدُّنۡيَا وَٱلۡأٓخِرَةِ وَمَا لَهُم مِّن نَّـٰصِرِينَ

Transliteration: (Ulaaa'ikal lazeena habitat a'maaluhum fid dunyaa wal Aaakhirati wa maa lahum min naasireen)

22. वे वही हैं जिनके कर्म न इस दुनिया में उन्हें कोई लाभ देंगे और न ही आने वाले काल में, और उनके लिए कोई सहायक भी नहीं होगा [49]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह आल-इमरान आयत 22 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

✅ [49] अपराधियों के लिए दोहरे प्रकार की सज़ा

  • ये नास्तिक दो तरह की सज़ा भोगेंगे:
  • उनके अच्छे कर्म बेकार हो जाएंगे—न तो ये इस दुनिया की परेशानियों में उनका सहारा बनेंगे, न ही आने वाली जिंदगी (आख़िरत) में उन्हें कोई इनाम मिलेगा।
  • क़ियामत के दिन उनके लिए कोई मददगार नहीं होगा, जबकि मोमिनों को उनके अच्छे कर्मों का सहारा मिलेगा और उन्हें शफ़ाअत (इंटरसेशन) का भी लाभ मिलेगा।

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