कुरान - 3:20 सूरह आल-इमरान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

20
فَإِنۡ حَآجُّوكَ فَقُلۡ أَسۡلَمۡتُ وَجۡهِيَ لِلَّهِ وَمَنِ ٱتَّبَعَنِۗ وَقُل لِّلَّذِينَ أُوتُواْ ٱلۡكِتَٰبَ وَٱلۡأُمِّيِّـۧنَ ءَأَسۡلَمۡتُمۡۚ فَإِنۡ أَسۡلَمُواْ فَقَدِ ٱهۡتَدَواْۖ وَّإِن تَوَلَّوۡاْ فَإِنَّمَا عَلَيۡكَ ٱلۡبَلَٰغُۗ وَٱللَّهُ بَصِيرُۢ بِٱلۡعِبَادِ

Transliteration: (Fa in haaajjooka faqul aslamtu wajhiya lillaahi wa manit taba'an; wa qul lillazeena ootul Kitaaba wal ummiyyeena 'a-aslamtum; fa in aslamoo faqadih tadaw wa in tawallaw fa innamaa 'alaikal balaagh; wallaahu baseerum bil 'ibaad)

फिर अगर वे आपसे हुज्जत करें, तो कह दीजिए: 'मैंने और मेरे पैरोकारों ने अपना रुख़ अल्लाह के ताबेअ कर दिया'; और अहले किताब और अनपढ़ों से कहिए: 'क्या तुम भी इस्लाम लाते हो?' पस अगर वे इस्लाम ले आएं तो यक़ीनन उन्होंने हिदायत पा ली, और अगर वे मुंह फेरें तो आपकी ज़िम्मेदारी सिर्फ़ पैग़ाम पहुंचा देना है; और अल्लाह अपने बंदों को ख़ूब देख रहा है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह आल-इमरान आयत 20 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह आले इमरान - आयत 20

✅ इस्लाम की दावत और नबी का मन्सब

रसूलुल्लाह (सल्ल.) को हुक्म हुआ कि अहले किताब और मुशरिकीन के सामने अपना अक़ीदा वाज़ेह कर दें कि हमने अल्लाह के हुज़ूर अपनी गर्दन झुका दी है; हिदायत कुफ़्र को छोड़कर इस्लाम क़बूल करने में है।

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