कुरान - 3:33 सूरह आल-इमरान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

33
۞إِنَّ ٱللَّهَ ٱصۡطَفَىٰٓ ءَادَمَ وَنُوحٗا وَءَالَ إِبۡرَٰهِيمَ وَءَالَ عِمۡرَٰنَ عَلَى ٱلۡعَٰلَمِينَ

Transliteration: (Innal laahas tafaaa Aadama wa Noohanw wa Aala Ibraaheema wa Aala Imraana 'alal 'aalameen)

33. निश्चय ही अल्लाह ने आदम, नूह, इब्राहीम के परिवार और इमरान के परिवार को दुनियाओं के सभी लोगों में से चुना है [71]. (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह आल-इमरान आयत 33 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

[71] धार्मिक वंश से सम्मान

इस आयत का मतलब है कि पवित्र और नेक वंश से होना खुद में एक बड़ा धार्मिक सम्मान है। जो लोग पैग़ंबर इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) के वंशज हैं, उन्हें इस लिए भी सम्मान मिला क्योंकि वे एक महान पैग़ंबर के विश्वासी संताने हैं।

[71] अल्लाह की नज़रों में उच्च स्थान

इसका मतलब यह भी है कि अल्लाह के हुक्म से कुछ परिवारों को दूसरों से ऊपर दर्जा मिला है। यह श्रेष्ठता उनकी आस्था और नेक नीयत का परिणाम है।

[71] वंश और ईमान का मेल

यह आयत हमें सिखाती है कि सिर्फ वंश के कारण नहीं, बल्कि उस वंश में मौजूद सच्चे विश्वास और नेकाई की वजह से सम्मान मिलता है। इसलिए वंश के साथ-साथ अपनी आस्था और कर्मों को भी मजबूत करना आवश्यक है।

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