कुरान - 3:37 सूरह आल-इमरान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

37
فَتَقَبَّلَهَا رَبُّهَا بِقَبُولٍ حَسَنٖ وَأَنۢبَتَهَا نَبَاتًا حَسَنٗا وَكَفَّلَهَا زَكَرِيَّاۖ كُلَّمَا دَخَلَ عَلَيۡهَا زَكَرِيَّا ٱلۡمِحۡرَابَ وَجَدَ عِندَهَا رِزۡقٗاۖ قَالَ يَٰمَرۡيَمُ أَنَّىٰ لَكِ هَٰذَاۖ قَالَتۡ هُوَ مِنۡ عِندِ ٱللَّهِۖ إِنَّ ٱللَّهَ يَرۡزُقُ مَن يَشَآءُ بِغَيۡرِ حِسَابٍ

Transliteration: (Fataqabba lahaa Rabbuhaa biqaboolin hasaninw wa ambatahaa nabaatan hasananw wa kaffalahaa Zakariyyaa kullamaa dakhala 'alaihaa Zakariyyal Mihraaba wajada 'indahaa rizqan qaala yaa Maryamu annaa laki haazaa qaalat huwa min 'indil laahi innal laaha yarzuqu mai yashaaa'u bighairi hisaab)

37. इसलिए उसके रब ने उसे कृपा से स्वीकार किया और उसे पवित्रता में बढ़ाया तथा उत्तम विकास दिया [79] और ज़करिय्या को उसका सरपरस्त बनाया [80]. जब भी ज़करिय्या उसकी प्रार्थना की जगह में आते, तो उसे ताज़ा भोजन मिलता। उन्होंने पूछा: "हे मरियम, यह तुझे कहाँ से मिलता है?" उसने कहा: "यह अल्लाह से है।" निश्चय ही अल्लाह जिसे चाहे बिना किसी हिसाब के देता है [81]. (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह आल-इमरान आयत 37 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

[79] कन्या होने के बावजूद अल-अक्सा में सेवा के लिए स्वीकार

सय्यिदह मरियम (अलैहिस्सलाम) को बेइत अल-मुकद्दस (मस्जिद अल-अक्सा) में सेवा के लिए स्वीकार किया गया, जबकि परंपरागत रूप से वहां केवल लड़कों को सेवा करने की अनुमति थी। यह अल्लाह की एक विशेष कृपा और सम्मान थी।

[80] उनका अद्भुत विकास

उनका आध्यात्मिक और शारीरिक विकास असाधारण था—उनका एक दिन का विकास दूसरों के एक वर्ष के बराबर था। यह उनकी भविष्य की भूमिका के लिए अल्लाह की तैयारी और विशेष कृपा को दर्शाता है।

[81] ज़करिय्या (अलैहिस्सलाम) का सरपरस्ती कार्य

बैत अल-मुकद्दस के 27 अहबार (संरक्षक) थे, जो हज़रत हारून (अलैहिस्सलाम) के वंशज थे। उनके प्रमुख, हज़रत ज़करिय्या (अलैहिस्सलाम), जो मरियम के मामा थे, को उनकी देखभाल का दायित्व सौंपा गया। इस जिम्मेदारी को उन्होंने बहुत प्रेम और समर्पण के साथ निभाया।

चमत्कार और आध्यात्मिक वास्तविकताएं

  • संतों के चमत्कार सच्चे होते हैं—सय्यिदह मरियम (अलैहिस्सलाम) को अल्लाह से असामयिक फल सीधे मिलते थे।
  • संतान से ही सेंट बन सकती है, केवल कर्मों से नहीं—मरियम बचपन से ही एक पवित्र शख्सियत थीं।
  • अल्लाह अपने संतों को 'इल्म-ए-लदुन्नी' (दिव्य प्रेरित ज्ञान) देता है, जैसा कि उनके शांत और प्रेरित उत्तर में दिखता है।
  • कुछ अल्लाह के खास दोस्त स्वर्गीय खुराक प्राप्त करते हैं, जो सांसारिक साधनों से परे होती है।
  • मरियम (अलैहिस्सलाम) को सामान्य भोजन या दूध से नहीं, बल्कि दिव्य पोषण से रखा गया क्योंकि उनकी माँ ने जन्म के तुरंत बाद उन्हें अहबार के संरक्षण में सौंप दिया था।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now