Transliteration: (Hunaaalika da'aa Zakariyyaa Rabbahoo qaala Rabbi hab lee mil ladunka zurriyyatan taiyibatan innaka samee'ud du'aaa')
हज़रत ज़करिय्या (अलैहिस्सलाम) ने सय्यिदह मरियम (रज़ि.) की मौजूदगी में बच्चे की दुआ मांगी। इससे हमें यह सीख मिलती है कि संतों की मौजूदगी में दुआ करना पैग़ंबरों की प्रथा है, क्योंकि ऐसे स्थान पाक होते हैं और दुआ जल्दी कबूल होती है। अल्लाह ने कुरान में भी इस बात की तस्दीक की है कि ऐसे पाक जगहों की इज्ज़त और हज़रतों के मक़बरों का सम्मान किया जाए।
पैग़ंबरों की सन्नत यह रही कि वे संतान के लिए दुआ करते थे — न कि अपने स्वार्थ के लिए, बल्कि इस लिए कि उनकी संतान नेक और समाज के लिए फ़ायदेमंद बने। ऐसी संतान माता-पिता की मौत के बाद भी उनके लिए ज़मीन पर और कब्र में सलाख़ों का सहारा बनी रहती है।
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