कुरान - 3:40 सूरह आल-इमरान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

40
قَالَ رَبِّ أَنَّىٰ يَكُونُ لِي غُلَٰمٞ وَقَدۡ بَلَغَنِيَ ٱلۡكِبَرُ وَٱمۡرَأَتِي عَاقِرٞۖ قَالَ كَذَٰلِكَ ٱللَّهُ يَفۡعَلُ مَا يَشَآءُ

Transliteration: (Qaala Rabbi annaa yakoonu lee ghulaamunw wa qad balaghaniyal kibaru wamraatee 'aaqirun qaala kazaalikal laahu yaf'alu maa yashaaa')

40. उन्होंने कहा: "हे मेरे रब, मेरे पास पहले ही बुढ़ापा आ चुका है और मेरी पत्नी बांझ है, फिर मुझे पुत्र कैसे होगा?" [88] उसने (अल्लाह) कहा: "अल्लाह वही करता है जो वह चाहता है।" [89] (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह आल-इमरान आयत 40 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

[88] जिज्ञासा से सवाल, शक से नहीं

हज़रत ज़करिय्या (अलैहिस्सलाम) लगभग 120 वर्ष के थे और उनकी पत्नी 98 वर्ष की थीं। उनका यह सवाल संदेह या नास्तिकता से नहीं, बल्कि समझने की जिज्ञासा से था कि क्या अल्लाह उनकी उम्र को कम करेगा या फिर बुजुर्ग अवस्था में भी संतान देगा। इसलिए इस सवाल में कोई नकारात्मक भावना नहीं थी।

[89] अल्लाह की सत्ता पूरी और असीम है

अल्लाह का जवाब इस बात की पुष्टि करता है कि उनकी शक्ति लाखों नियमों और तर्कों से परे है। वे अपनी मर्जी से जो चाहे कर सकते हैं। चाहे बुढ़ापा हो या असंभव सा लगे, अल्लाह संतान देने में सक्षम हैं।

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