Transliteration: (Qaala Rabbi annaa yakoonu lee ghulaamunw wa qad balaghaniyal kibaru wamraatee 'aaqirun qaala kazaalikal laahu yaf'alu maa yashaaa')
हज़रत ज़करिय्या (अलैहिस्सलाम) लगभग 120 वर्ष के थे और उनकी पत्नी 98 वर्ष की थीं। उनका यह सवाल संदेह या नास्तिकता से नहीं, बल्कि समझने की जिज्ञासा से था कि क्या अल्लाह उनकी उम्र को कम करेगा या फिर बुजुर्ग अवस्था में भी संतान देगा। इसलिए इस सवाल में कोई नकारात्मक भावना नहीं थी।
अल्लाह का जवाब इस बात की पुष्टि करता है कि उनकी शक्ति लाखों नियमों और तर्कों से परे है। वे अपनी मर्जी से जो चाहे कर सकते हैं। चाहे बुढ़ापा हो या असंभव सा लगे, अल्लाह संतान देने में सक्षम हैं।
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