कुरान - 3:41 सूरह आल-इमरान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

41
قَالَ رَبِّ ٱجۡعَل لِّيٓ ءَايَةٗۖ قَالَ ءَايَتُكَ أَلَّا تُكَلِّمَ ٱلنَّاسَ ثَلَٰثَةَ أَيَّامٍ إِلَّا رَمۡزٗاۗ وَٱذۡكُر رَّبَّكَ كَثِيرٗا وَسَبِّحۡ بِٱلۡعَشِيِّ وَٱلۡإِبۡكَٰرِ

Transliteration: (Qaala Rabbij 'al leee Aayatan qaala Aaayatuka allaa tukalliman naasa salaasata ayyaamin illa ramzaa; wazkur Rabbaka kaseeranw wa sabbih bil'ashiyyi wal ibkaar)

उसने कहा: ऐ मेरे रब! मेरे लिए कोई निशानी बना दे [90]। उसने फ़रमाया: तेरी निशानी यह होगी कि तू लोगों से तीन दिन तक इशारे के सिवा कोई बात नहीं करेगा, और तू अपने रब को बहुत ज़िक्र कर [91], और शाम और सुबह उसकी तस्बीह कर [92]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह आल-इमरान आयत 41 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह आले-इमरान – आयत 41 की तफ़्सीर

 

✅ [90] नेमत की पहचान के लिए निशानी

हज़रत ज़करिय्या (अलैहिस्सलाम) ने अपने रब से यह दुआ की कि उन्हें कोई ऐसी निशानी दी जाए जिससे उन्हें पता चल सके कि उनकी पत्नी गर्भवती हो गई हैं, ताकि वे इस नेमत पर पूरी तरह अल्लाह की याद में लीन होकर शुक्र अदा कर सकें।

✅ [91] शुक्र और पैदाइश से पहले मोजज़ा

इससे दो बातें निकलती हैं:

  1. नेक औलाद मिलने पर शुक्र अदा करना ज़रूरी है—जैसे कि अक़ीक़ा, सदक़ा और नफ़्ल इबादत के ज़रिये।
  2. यह आयत दिखाती है कि पैग़म्बरों के मोजज़े औलाद की पैदाइश से पहले भी ज़ाहिर हो सकते हैं। हज़रत ज़करिय्या (अलैहिस्सलाम) तीन दिन तक लोगों से बात करने की ताक़त खो बैठे, लेकिन ज़िक्र में मशग़ूल रहे—यह मोजज़ा हज़रत याह्या (अलैहिस्सलाम) की पैदाइश से पहले का था।

✅ [92] सुबह और शाम की तस्बीह

हालाँकि अल्लाह का ज़िक्र हर वक़्त फ़ज़ीलत वाला है, लेकिन सुबह और शाम के वक़्त ज़िक्र की खास अहमियत है, क्योंकि इन वक़्तों में फ़रिश्ते भी हाज़िर होते हैं। जैसा कि बयान हुआ: “निःसंदेह, कुरआन की फज्र की तिलावत में फ़रिश्ते मौजूद होते हैं।” (सूरह बनी इसराईल, 17:78)
इन वक़्तों में तमाम मख़लूकात अल्लाह की तस्बीह करती है।

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