Transliteration: (Wa yukallimun naasa filmahdi wa kahlanw wa minassaaliheen)
हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) ने अपने पालने में ही बोलकर अपनी माँ की पाकीज़गी का बचाव किया—यह उनका पहला मोज़ज़ा था।
वह दूसरी बार लोगों से बोलेंगे जब वह क़ियामत से पहले इस धरती पर वापस लौटेंगे।
इन दोनों मौकों पर बोलना उनकी नबूवत और अल्लाह की मदद का निशान है। यह साबित करता है कि:
कुरआन में हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) की कई विशेषताएँ बयान की गई हैं:
क़ियामत के दिन, हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) के ज़रिये रसूलुल्लाह ﷺ का दर्जा मख़लूक़ के सामने ज़ाहिर होगा।
इससे पता चलता है कि पैग़म्बरों की तारीफ़ और उनका सम्मान खुद अल्लाह का तरीक़ा है।
अल्लाह हमें भी अपने चुने हुए बंदों की अज़मत पहचानने और उन्हें सम्मान देने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए।
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