कुरान - 3:47 सूरह आल-इमरान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

47
قَالَتۡ رَبِّ أَنَّىٰ يَكُونُ لِي وَلَدٞ وَلَمۡ يَمۡسَسۡنِي بَشَرٞۖ قَالَ كَذَٰلِكِ ٱللَّهُ يَخۡلُقُ مَا يَشَآءُۚ إِذَا قَضَىٰٓ أَمۡرٗا فَإِنَّمَا يَقُولُ لَهُۥ كُن فَيَكُونُ

Transliteration: (Qaalat Rabbi annaa yakoonu lee waladunw wa lam yamsasnee basharun qaala kazaalikil laahu yakhluqu maa yashaaa'; izaa qadaaa amran fa innamaa yaqoolu lahoo kun fayakoon)

मरयम ने कहा: ऐ मेरे रब! मेरे कैसे बेटा होगा जबकि मुझे किसी मर्द ने छुआ भी नहीं? फ़रिश्ते ने कहा: अल्लाह ऐसे ही करता है जो वह चाहता है। जब वह किसी चीज़ का हुक्म देता है, तो बस कहता है "हो जा", और वह हो जाती है [102]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह आल-इमरान आयत 47 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह आले-इमरान – आयत 47 की तफ़्सीर

 

✅ [102] कुंवारी माँ बनना – अल्लाह के हुक्म से

सैय्यदा मरयम (रज़ियल्लाहु अन्हा) ने यह सवाल हैरानी के साथ किया, शक या इंकार के साथ नहीं।
उन्होंने पूछा कि बग़ैर मर्द के संपर्क के उनके यहाँ बेटा कैसे होगा?
फ़रिश्ते ने जवाब दिया कि अल्लाह तआला प्राकृतिक क़ानूनों का मोहताज नहीं, वह जो चाहे कर सकता है।
मरयम (रज़ि.) माँ बनेंगी, लेकिन फिर भी कुँवारी रहेंगी, और यह अल्लाह की कुदरत का करिश्मा होगा।
जब अल्लाह किसी चीज़ का इरादा करता है, तो बस "कुन" (हो जा) कहता है, और वह वजूद में आ जाती है।
यह आयत अल्लाह की ताक़त और उसके हुक्म की बेजोड़ क़ुव्वत को बयान करती है।

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