Transliteration: (Innaa haazaa lahuwal qasasul haqq; wa maa min ilaahin illal laah; wa innal laahaa la Huwal 'Azeezul Hakeem)
यह आयत हज़रत ईसा (अलैहि सलाम) के संबंध में वर्णित सच्चे विवरण का निष्कर्ष है, जो यह सिद्ध करता है कि:
वह एक पैग़म्बर थे, ख़ुदा के बेटे नहीं, उनका जन्म चमत्कारिक था, और उन्होंने चमत्कार दिखाए तथा सच्चा संदेश पहुँचाया। जब नबी करीम ﷺ हसन, हुसैन, फातिमा और अली (रज़ि.) के साथ मुबाहला के लिए आए, तो नजरान के ईसाई पादरी, अहल-ए-बैत के नूरानी चेहरों को देखकर पीछे हट गए। हदीस के अनुसार, यदि वे मुबाहला में सम्मिलित होते, तो तुरंत विनष्ट हो जाते।
यह आयत तौहीद (अल्लाह की एकता) को मज़बूती से स्थापित करती है और ईसा (अलैहि सलाम) को अल्लाह का बेटा मानने की ग़लत सोच को तोड़ती है।
यदि ईसा (अलैहि सलाम) सचमुच ख़ुदा के बेटे होते, तो मरयम (रज़ि.) को अल्लाह की पत्नी मानना पड़ता, जो कि स्पष्ट रूप से असत्य है। सच्चाई यह है कि अल्लाह के सिवा कोई पूज्य नहीं, और वह इंसानी गुणों या रिश्तों से पूरी तरह पाक है।
साथ ही यह भी सिखाया गया है कि:
محبت या सेवा समानता की मांग नहीं करती —
जैसे:
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