कुरान - 3:64 सूरह आल-इमरान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

64
قُلۡ يَـٰٓأَهۡلَ ٱلۡكِتَٰبِ تَعَالَوۡاْ إِلَىٰ كَلِمَةٖ سَوَآءِۭ بَيۡنَنَا وَبَيۡنَكُمۡ أَلَّا نَعۡبُدَ إِلَّا ٱللَّهَ وَلَا نُشۡرِكَ بِهِۦ شَيۡـٔٗا وَلَا يَتَّخِذَ بَعۡضُنَا بَعۡضًا أَرۡبَابٗا مِّن دُونِ ٱللَّهِۚ فَإِن تَوَلَّوۡاْ فَقُولُواْ ٱشۡهَدُواْ بِأَنَّا مُسۡلِمُونَ

Transliteration: (Qul yaa Ahlal Kitaabi ta'aalaw ilaa Kalimatin sawaaa'im bainanaa wa bainakum allaa na'buda illal laaha wa laa nushrika bihee shai'anw wa laa yattakhiza ba'dunaa ba'dan arbaabam min doonil laah; fa in tawallaw faqoolush hadoo bi annaa muslimoon)

(हे नबी!) कह दीजिए: "ऐ किताबवालो! आओ एक ऐसी बात की ओर, जो हमारे और तुम्हारे बीच समान है [138] — कि हम अल्लाह के सिवा किसी की इबादत न करें, और उसके साथ किसी को साझी न ठहराएँ [139], और हममें से कोई अल्लाह को छोड़कर किसी को अपना रब न बनाए।" फिर यदि वे मुँह फेर लें, तो कह दो: "गवाह रहो कि हम मुस्लिम हैं [140]।" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह आल-इमरान आयत 64 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा आले-इमरान – आयत 64 की तफ़्सीर

 

✅ [138] सभी दिव्य ग्रंथों में साझा संदेश

तौहीद (अल्लाह की एकता) वह मूल विश्वास है जो तौरात, इंजील और क़ुरआन — सभी में समान रूप से मौजूद है। इससे यह सिद्ध होता है कि यक़ीन (अक़ीदा) हमेशा एक रहा है, हालांकि शरीअत (व्यवहारिक कानून) समय और पैग़म्बरों के अनुसार बदलती रही है।

✅ [139] न पैग़म्बरों को और न ही उलेमा को रब बनाओ

इस भाग में यह स्पष्ट किया गया है:

  • यहूदियों ने हज़रत उज़ैर (अलैहि सलाम) को रब मानकर गलती की,
  • ईसाइयों ने हज़रत ईसा (अलैहि सलाम) को ख़ुदा का दर्जा देकर शिर्क किया।
    इसी तरह, अगर कोई अनुयायी किसी आलिम की बात को उस वक़्त भी माने जब वह अल्लाह के हुक्म के खिलाफ हो, तो वह भी शिर्क में पड़ जाता है।
    अल्लाह के अलावा किसी को रब मानना, यानी उसका हुक्म अल्लाह के हुक्म से ऊपर रखना — सपष्ट शिर्क है।

⚠️ महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण:
एक पैग़म्बर कहता है: "मैं अल्लाह का रसूल हूँ" — यह उसका दावा सही है। लेकिन कोई आम व्यक्ति अगर यही दावा करे, तो वह काफ़िर हो जाता है, क्योंकि पैग़म्बर स्वयं ईमान का स्रोत होते हैं, जबकि उनके मानने वाले सिर्फ़ उन पर ईमान लाते हैं।

✅ [140] इस्लाम का मतलब है सिर्फ़ अल्लाह के सामने सर झुकाना

"हम मुस्लिम हैं" कहने का मतलब है:
सच्चा मुसलमान वही है जो हज़रत मुहम्मद ﷺ का अनुसरण करता है।
यहूदी और ईसाई, अपने पादरियों और आलिमों को सजदा करके, उन्हें गुनाह माफ़ करने वाला मानते थे — और इस तरह वे उन्हें अल्लाह के अलावा रब बना लेते थे, जो शिर्क है।

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