कुरान - 3:74 सूरह आल-इमरान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

74
يَخۡتَصُّ بِرَحۡمَتِهِۦ مَن يَشَآءُۗ وَٱللَّهُ ذُو ٱلۡفَضۡلِ ٱلۡعَظِيمِ

Transliteration: (Yakhtassu birahmatihee mai yashaaa'; wallaahu zulfadlil 'azeem)

वह जिसे चाहता है, अपनी रहमत के लिए चुन लेता है [156]। और अल्लाह बड़े फ़ज़ल (बख़्शिश) वाला है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह आल-इमरान आयत 74 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा आले-इमरान – आयत 74 की तफ़्सीर

 

✅ [156] नबूवत सिर्फ़ अल्लाह की रहमत से मिलती है

इस आयत से यह बात स्पष्ट होती है कि नबूवत और रहमत का हक़ सिर्फ़ वही बंदा पा सकता है जिसे अल्लाह चाहे।

👉 अल्लाह तआला जिसे इज़्ज़त देना चाहे, कोई उसे ज़लील नहीं कर सकता।
👉 पैग़म्बरी का दरवाज़ा अब बंद हो चुका है, और आख़िरी नबी हमारे प्यारे नबी हज़रत मुहम्मद ﷺ हैं।
👉 अब जो भी नबूवत का दावा करता है, वह झूठा है, दग़ाबाज़ है और दीन से ख़ारिज है।

अल्लाह की रहमत किसी नस्ल, जाति, या दावे पर नहीं, बल्कि उसके इख़्तियार और हिकमत पर आधारित होती है। यही असल ईमान और समझ है।

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