कुरान - 3:76 सूरह आल-इमरान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

76
بَلَىٰۚ مَنۡ أَوۡفَىٰ بِعَهۡدِهِۦ وَٱتَّقَىٰ فَإِنَّ ٱللَّهَ يُحِبُّ ٱلۡمُتَّقِينَ

Transliteration: (Balaa man awfaa bi'ahdihee wattaqaa fainnal laaha yuhibbul muttaqeen)

हाँ, जो कोई अपना वादा पूरा करता है [161] और अल्लाह से डरता है, तो निश्चय ही अल्लाह उन पर महरबान होता है जो परहेज़गार हैं। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह आल-इमरान आयत 76 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा आले-इमरान – आयत 76 की तफ़्सीर

 

✅ [161] वादों की पूर्ति और तक़वा — अल्लाह की पसंद

इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि:

➡️ हर प्रकार का वादा निभाना अनिवार्य है — चाहे वह वादा अल्लाह से किया गया हो, रसूल ﷺ से, मुरशिद (रूहानी रहबर) से, निकाह के समय जीवनसाथी से, या फिर रिश्तेदारों से।

➡️ इस आयत में ईमानदारी, ज़िम्मेदारी, और तक़वा (अल्लाह का डर) को इस्लामी शरीअत के मूल सिद्धांतों में से एक बताया गया है।

📌 वादे का पालन सिर्फ़ सामाजिक अनुशासन नहीं बल्कि इबादत का दर्जा रखता है, और इसकी अदायगी पर अल्लाह की मोहब्बत हासिल होती है।

🟢 जिनके दिलों में तक़वा होता है, वे कभी वादाख़िलाफ़ी नहीं करते, और ऐसे ही लोग अल्लाह के सच्चे महबूब होते हैं।

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