Transliteration: (Balaa man awfaa bi'ahdihee wattaqaa fainnal laaha yuhibbul muttaqeen)
इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि:
➡️ हर प्रकार का वादा निभाना अनिवार्य है — चाहे वह वादा अल्लाह से किया गया हो, रसूल ﷺ से, मुरशिद (रूहानी रहबर) से, निकाह के समय जीवनसाथी से, या फिर रिश्तेदारों से।
➡️ इस आयत में ईमानदारी, ज़िम्मेदारी, और तक़वा (अल्लाह का डर) को इस्लामी शरीअत के मूल सिद्धांतों में से एक बताया गया है।
📌 वादे का पालन सिर्फ़ सामाजिक अनुशासन नहीं बल्कि इबादत का दर्जा रखता है, और इसकी अदायगी पर अल्लाह की मोहब्बत हासिल होती है।
🟢 जिनके दिलों में तक़वा होता है, वे कभी वादाख़िलाफ़ी नहीं करते, और ऐसे ही लोग अल्लाह के सच्चे महबूब होते हैं।
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