Transliteration: (Innal lazeena yashtaroona bi'ahdil laahi wa aymaanihim samanan qaleelan ulaaa'ika laa khalaaqa lahum fil Aakhirati wa laa yukallimuhumul laahu wa laa yanzuru ilaihim Yawmal Qiyaamati wa laa yuzakkeehim wa lahum 'azabun 'aleem)
जो लोग झूठी क़सम खाकर दौलत हासिल करते हैं, रिश्वत के लिए झूठी गवाही देते हैं, जानबूझकर मुक़दमे हारने के लिए पैसे लेते हैं — वे सब इस चेतावनी के दायरे में आते हैं।
अल्लाह क़ियामत के दिन ऐसे लोगों से ना तो बात करेगा, और ना ही उनकी तरफ़ नज़र डालेगा। यह अल्लाह की रहमत से पूरी तरह महरूम होना है, जो अपने आप में एक बहुत बड़ी सज़ा है।
ऐसे लोग पाक नहीं किए जाएंगे और न ही उन्हें माफ़ किया जाएगा। अगर वे काफ़िर होंगे तो सदा की सज़ा में रहेंगे, और अगर मोमिन होंगे तो अल्लाह चाहे तो सज़ा के बाद माफ़ कर सकता है।
रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया: "तीन लोग ऐसे होंगे जिनसे अल्लाह क़ियामत के दिन ना तो बात करेगा, ना ही उन्हें पाक करेगा, और उन्हें दर्दनाक सज़ा दी जाएगी: (1) जो अपने एहसान जता कर देता है, (2) जो घमंड में पाजामा टखनों से नीचे पहनता है, (3) और जो झूठी क़सम खाकर सौदा करता है।" इसके बाद आपने यही आयत तिलावत की।
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