कुरान - 3:79 सूरह आल-इमरान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

79
مَا كَانَ لِبَشَرٍ أَن يُؤۡتِيَهُ ٱللَّهُ ٱلۡكِتَٰبَ وَٱلۡحُكۡمَ وَٱلنُّبُوَّةَ ثُمَّ يَقُولَ لِلنَّاسِ كُونُواْ عِبَادٗا لِّي مِن دُونِ ٱللَّهِ وَلَٰكِن كُونُواْ رَبَّـٰنِيِّـۧنَ بِمَا كُنتُمۡ تُعَلِّمُونَ ٱلۡكِتَٰبَ وَبِمَا كُنتُمۡ تَدۡرُسُونَ

Transliteration: (Maa kaana libasharin ai yu'tiyahul laahul Kitaaba walhukma wan Nubuwwata summa yaqoola linnaasi koonoo 'ibaadal lee min doonil laahi wa laakin koonoo rabbaaniy yeena bimaa kuntum tu'allimoonal Kitaaba wa bimaa kuntum tadrusoon)

किसी इंसान का यह काम नहीं कि अल्लाह तो उसे किताब, हिकमत और नुबुव्वत अता फ़रमाए फिर वह लोगों से कहे कि 'अल्लाह को छोड़कर मेरे बंदे बन जाओ', बल्कि (वह तो यही कहेगा कि) 'तुम सच्चे रब्बानी (अल्लाह वाले) बनो, क्योंकि तुम किताब की तालीम देते हो और ख़ुद भी उसे पढ़ते हो।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह आल-इमरान आयत 79 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह आले इमरान - आयत 79

✅ नबियों की तालीमे तौहीद

कोई नबी कभी अपनी परस्तिश की दावत नहीं देता। ईसाई जो हज़रत ईसा (अलै.) की इबादत करते हैं, वह सरासर बातिल है; हर पैग़म्बर ने सिर्फ़ अल्लाह की बंदगी (रब्बानी बनने) की तालीम दी।

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