Transliteration: (Wa inna minhum lafaree qany yalwoona alsinatahum bil Kitaabi litahsaboohu minal Kitaab, wa maa huwa minal Kitaabi wa yaqooloona huwa min 'indillaahi wa maa huwa min 'indillaahi wa yaqooloona 'alal laahil kaziba wa hum ya'lamoon)
यह उन लोगों की बात है जो बनावटी बातों को इस तरह पढ़ते थे कि वह तौरात की आयतें मालूम हों, ताकि लोगों को धोखा देकर गुमराह किया जा सके। इससे यह शिक्षा मिलती है कि ग़ैर-क़ुरआनी चीज़ों को क़ुरआन जैसा पढ़ना या पेश करना गलत है।
ऐसी किसी भी चीज़ को इस अंदाज़ में लिखना या पढ़ना कि वह क़ुरआन का हिस्सा लगे, सख्त मना है। अरबी शरहों (व्याख्याओं) में क़ुरआनी और ग़ैर-क़ुरआनी बातों में साफ़ फ़र्क़ किया जाता है, ताकि कोई भ्रम न हो।
जो लोग अल्लाह पर जानबूझ कर झूठ बाँधते हैं, उनका गुनाह उन लोगों से कहीं ज़्यादा है जो अज्ञानता में ऐसा करते हैं। क़ुरआन बार-बार बताता है कि वे लोग सच्चाई जानते थे, फिर भी उसे तोड़-मरोड़ कर पेश किया।
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