कुरान - 3:90 सूरह आल-इमरान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

90
إِنَّ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ بَعۡدَ إِيمَٰنِهِمۡ ثُمَّ ٱزۡدَادُواْ كُفۡرٗا لَّن تُقۡبَلَ تَوۡبَتُهُمۡ وَأُوْلَـٰٓئِكَ هُمُ ٱلضَّآلُّونَ

Transliteration: (Innal lazeena kafaroo ba'da eemaanihim summaz daadoo kufral lan tuqbala tawbatuhum wa ulaaa'ika humud daaalloon)

बेशक जिन लोगों ने ईमान लाने के बाद कुफ़्र किया फिर कुफ़्र में बढ़ते चले गए, उनकी तौबा हरगिज़ क़बूल न होगी, और वही लोग गुमराह हैं। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह आल-इमरान आयत 90 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह आले इमरान - आयत 90

✅ कुफ़्र में हठधर्मी और तौबा की ना-मक़बूलियत

जो लोग कुफ़्र और दुश्मनी में हद से बढ़ जाते हैं और ऐन मौत या अज़ाब के वक़्त तौबा का ढोंग करते हैं, उनकी तौबा क़बूल नहीं होती।

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