कुरान - 3:91 सूरह आल-इमरान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

91
إِنَّ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْ وَمَاتُواْ وَهُمۡ كُفَّارٞ فَلَن يُقۡبَلَ مِنۡ أَحَدِهِم مِّلۡءُ ٱلۡأَرۡضِ ذَهَبٗا وَلَوِ ٱفۡتَدَىٰ بِهِۦٓۗ أُوْلَـٰٓئِكَ لَهُمۡ عَذَابٌ أَلِيمٞ وَمَا لَهُم مِّن نَّـٰصِرِينَ

Transliteration: (Innal lazeena kafaroo wa maatoo wa hum kuffaarun falany yuqbala min ahadihim mil'ul ardi zahabanw wa lawiftadaa bih; ulaaa 'ika lahum 'azaabun aleemunw wa maa lahum min naasireen)

बेशक जिन लोगों ने कुफ़्र किया और कुफ़्र ही की हालत में मर गए, तो उनमें से किसी से ज़मीन भर सोना भी हरगिज़ क़बूल नहीं किया जाएगा चाहे वह अपनी जान छुड़ाने के लिए फ़िदया में ही दे दे; उनके लिए दर्दनाक अज़ाब है और उनका कोई मददगार न होगा। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह आल-इमरान आयत 91 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह आले इमरान - आयत 91

✅ हालत-ए-कुफ़्र में मौत का हौलनाक अंजाम

जो शख़्स कुफ़्र पर मर गया, आख़िरत में अगर वह पूरी ज़मीन के बराबर सोना भी अपनी नजात के लिए दे तो अल्लाह उसे क़बूल नहीं फ़रमाएगा।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now