Transliteration: (Lan tanaalul birra hattaa tunfiqoo mimmaa tuhibboon; wa maa tunfiqoo min shai'in fa innal laaha bihee 'Aleem)
यहाँ नेक़ी से मुराद है तक़्वा, अल्लाह की फ़रमाबरदारी और आख़िरत में जन्नत। इसे पाना सिर्फ़ बातों से नहीं, बल्कि कुर्बानी और अमल से होता है।
इस आयत से कई बातें मालूम होती हैं:
चाहे खर्च छुपकर हो या खुले आम, और नियत अच्छी हो या बुरी — अल्लाह सब जानता है। इसलिए इख़लास (सच्ची नियत) से ही खर्च करना चाहिए, ख़ासकर जब अपनी प्यारी चीज़ दी जाए।
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