Transliteration: (Wa inna 'alaikum lahaa fizeen)
"और निस्संदेह, तुम पर निगरानियां नियुक्त की गई हैं।"
इस आयत से कुछ अहम बातें निकलकर सामने आती हैं:
सुरक्षा और आमाल की रिकॉर्डिंग के लिए फरिश्ते – अल्लाह ने इंसानों की सुरक्षा और उनके आमाल को दर्ज करने के लिए फरिश्तों को नियुक्त किया है। साठ फरिश्ते इंसानों की सुरक्षा करते हैं, जबकि चार फरिश्ते उनके आमाल को दर्ज करते हैं—दो दिन में और दो रात में।
फरिश्ते केवल इंसानों के लिए हैं – ये निगरान फरिश्ते सिर्फ इंसानों के लिए हैं, और किसी अन्य मखलूक (प्राणी) के लिए नहीं, यही कारण है कि आयत में "तुम पर" शब्द का इस्तेमाल किया गया है।
अल्लाह की सुरक्षा में फरिश्तों की भूमिका – जबकि असल सुरक्षा अल्लाह की ओर से आती है, वह अपने फरिश्तों को अपनी एजेंट्स के तौर पर नियुक्त करता है। जैसे फरिश्ते सुरक्षा करते हैं, वैसे ही यह कहना भी सही है कि हज़रत मुहम्मद ﷺ अपने अनुयायियों की कठिनाइयों में मदद करते हैं और उन्हें सुरक्षा प्रदान करते हैं।
फरिश्तों की मौजूदगी का आदर – एक इंसान को बुरे स्थानों और गुनाहगार माहौल से बचना चाहिए, ताकि ये पाक फरिश्ते उन्हें ऐसे स्थानों पर न ले जाएं।
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