कुरान - 82:12 सूरह अल-इन्फितार अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

12
يَعۡلَمُونَ مَا تَفۡعَلُونَ

Transliteration: (Ya'lamoona ma taf'aloon )

12. जो जानते हैं कि तुम क्या करते हो [9]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-इन्फितार आयत 12 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

फरिश्तों का आमाल का ज्ञान (Angels’ Knowledge of Deeds) – आयत 82:12 की तफ़सीर (Commentary of the Verse 82:12)

"जो कुछ तुम करते हो, उसे जानते हैं।"

फरिश्तों की इंसानी आमाल पर नज़र (Angels’ Awareness of Human Actions)

हर तरह के आमाल शामिल हैं (All Aspects of Action Are Included) – इंसान के आमाल सिर्फ उसके हाथ-पैर के काम तक सीमित नहीं होते, बल्कि दिल, रूह और दिमाग से किए गए काम भी इनमें शामिल होते हैं।

इरादों और ख्यालों का लेखा-जोखा (Recording of Hidden Intentions and Thoughts) – अगर यह आयत सिर्फ ज़ाहिरी कामों के बारे में होती, तो फरिश्ते कैसे दर्ज कर सकते:

  • अच्छे और बुरे इरादे (Good and evil intentions)
  • नेक सोच (Good thoughts)
  • दिल और सांसों का ज़िक्र (Zikr of the heart and breath)
  • मोमिन का ईमान (Faith of the believer)
  • मुनाफिक़ का छुपा हुआ नफरत भरा दिल (Enmity of the hypocrite)

भूत और भविष्य के कामों की जानकारी (Angels’ Awareness of Present and Future Actions) – "जो कुछ तुम करते हो" का मतलब यह भी हो सकता है कि ये फरिश्ते न सिर्फ इंसान के किए हुए कामों को जानते हैं, बल्कि उसके आगे आने वाले कामों से भी वाक़िफ़ होते हैं, जैसा कि आलिमों ने बताया है।

लौह-ए-महफूज़ से संबंध (Connection with the Divine Tablet) – ये फरिश्ते लौह-ए-महफूज़ पर नज़र रखते हैं और वहीं लिखी हुई तक़दीर के मुताबिक़ इंसानों के रोज़ाना के आमाल दर्ज करते हैं।

फरिश्तों का ज्ञान और नबी का ज्ञान (Angels’ Knowledge vs. The Prophet’s Knowledge) – इस आयत से हमें यह भी समझ आता है कि अल्लाह ने इन फरिश्तों को इंसानों के बारे में बहुत सारा ग़ैबी इल्म दिया है, मगर हमारे प्यारे नबी मुहम्मद ﷺ का इल्म इनसे भी ज़्यादा और ऊँचा है।

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