कुरान - 17:76 सूरह अल-इस्रा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

76
وَإِن كَادُواْ لَيَسۡتَفِزُّونَكَ مِنَ ٱلۡأَرۡضِ لِيُخۡرِجُوكَ مِنۡهَاۖ وَإِذٗا لَّا يَلۡبَثُونَ خِلَٰفَكَ إِلَّا قَلِيلٗا

Transliteration: (Wa in kaadoo la yastafizzoonaka minal ardi liyukhri jooka minhaa wa izal laa yalbasoona khilaafaka illaa qaleelaa)

और वे लोग क़रीब थे कि इस सरज़मीन (मक्का) से आपके क़दम उखाड़ दें ताकि आपको यहाँ से निकाल बाहर करें; और अगर ऐसा होता तो आपके बाद वे भी ज़्यादा देर न ठहर पाते। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-इस्रा आयत 76 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह बनी इस्राईल (अल-इस्रा) - आयत 76

✅ मक्का से हिजरत और मुशरिकीन की हलाकत की पेशनगोई

कुफ़्फ़ारे मक्का रसूलुल्लाह (ﷺ) को शहर से निकालने या क़त्ल करने की साज़िशें रच रहे थे। अल्लाह ने फ़रमाया कि अगर वे अपने नबी को ज़बरदस्ती निकालेंगे, तो अल्लाह की सुन्नत के मुताबिक़ वे खुद भी अज़ाब से नहीं बच सकेंगे, चुनांचे हिजरत के चन्द साल बाद ही जंगे बद्र में उनके बड़े-बड़े सरदार हलाक हो गए।

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