कुरान - 17:77 सूरह अल-इस्रा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

77
سُنَّةَ مَن قَدۡ أَرۡسَلۡنَا قَبۡلَكَ مِن رُّسُلِنَاۖ وَلَا تَجِدُ لِسُنَّتِنَا تَحۡوِيلًا

Transliteration: (Sunnata man qad arsalnaa qablakamir Rusulinaa wa laa tajidu lisunnatinaa tahweelaa)

यह हमारा तरीक़ा (सुन्नत) रहा है उन तमाम रसूलों के बारे में जिन्हें हमने आपसे पहले भेजा था, और आप हमारे तरीक़े में कोई तब्दीली न पाएंगे। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-इस्रा आयत 77 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह बनी इस्राईल (अल-इस्रा) - आयत 77

✅ सुन्नत-ए-इलाही: रसूलों को झुठलाने वाली क़ौमों की हलाकत

अल्लाह का यह क़ानून अटल है कि जब कोई क़ौम अपने रसूल को मुकम्मल तौर पर झुठलाकर उसे निकालने या क़त्ल करने पर आमादा हो जाती है, तो अल्लाह उस सरकश क़ौम को हलाक कर देता है। अल्लाह के इस क़ानून में कभी कोई बदलाव नहीं आता।

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