कुरान - 17:75 सूरह अल-इस्रा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

75
إِذٗا لَّأَذَقۡنَٰكَ ضِعۡفَ ٱلۡحَيَوٰةِ وَضِعۡفَ ٱلۡمَمَاتِ ثُمَّ لَا تَجِدُ لَكَ عَلَيۡنَا نَصِيرٗا

Transliteration: (Izal la azaqnaaka di'fal hayaati wa di'fal mamaati summa laa tajidu laka 'alainaa naseeraa)

अगर ऐसा होता, तो हम आपको ज़िन्दगी में भी दोहरा अज़ाब चखाते और मौत के वक़्त भी दोहरा अज़ाब चखाते, फिर आप हमारे मुक़ाबले में अपना कोई मददगार न पाते। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-इस्रा आयत 75 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह बनी इस्राईल (अल-इस्रा) - आयत 75

✅ हक़ के मुआमले में समझौता न करने की शदीद ताकीद

यह उम्मत को समझाने के लिए एक अज़ीम हिकमत है कि जिसका मर्तबा जितना बुलंद होता है, ज़िम्मेदारी भी उतनी ही भारी होती है। अगर हक़ के पैग़ाम में ज़रा सा भी समझौता किया जाता तो सज़ा भी दोहरी होती। यह सबक है कि दीन और तौहीद के उसूलों पर कभी कोई समझौता नहीं हो सकता।

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