कुरान - 17:94 सूरह अल-इस्रा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

94
وَمَا مَنَعَ ٱلنَّاسَ أَن يُؤۡمِنُوٓاْ إِذۡ جَآءَهُمُ ٱلۡهُدَىٰٓ إِلَّآ أَن قَالُوٓاْ أَبَعَثَ ٱللَّهُ بَشَرٗا رَّسُولٗا

Transliteration: (Wa maa mana'an naasa any yu'minooo iz jaaa'ahumul hudaaa illaaa an qaalooo aba'asal laahu basharar Rasoolaa)

और लोगों को ईमान लाने से जब उनके पास हिदायत आ चुकी, किसी चीज़ ने नहीं रोका सिवाय इसके कि उन्होंने कहा, 'क्या अल्लाह ने एक इंसान को रसूल बनाकर भेजा है?' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-इस्रा आयत 94 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह बनी इस्राईल (अल-इस्रा) - आयत 94

✅ इंसान के रसूल होने पर नादानों का एतराज़

हर ज़माने के मुनकिरों का बुनियादी शुबहा यही रहा कि अल्लाह ने किसी फ़रिश्ते के बजाय हाड़-मांस के इंसान को अपना पैग़म्बर क्यों चुना। वे यह नहीं समझ सके कि इंसानों की हिदायत और अमली नमूने (role model) के लिए इंसान ही सबसे मौज़ूँ और मुकम्मल रहबर हो सकता है।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now