कुरान - 17:95 सूरह अल-इस्रा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

95
قُل لَّوۡ كَانَ فِي ٱلۡأَرۡضِ مَلَـٰٓئِكَةٞ يَمۡشُونَ مُطۡمَئِنِّينَ لَنَزَّلۡنَا عَلَيۡهِم مِّنَ ٱلسَّمَآءِ مَلَكٗا رَّسُولٗا

Transliteration: (Qul law kaana fil ardi malaaa 'ikatuny yamshoona mutma'in neena lanazzalnaa 'alaihim minas samaaa'i malakar Rasoolaa)

कह दीजिए कि 'अगर ज़मीन में फ़रिश्ते चैन और इत्मीनान से बस रहे होते, तो हम ज़रूर आसमान से उनके पास किसी फ़रिश्ते को रसूल बनाकर भेजते।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-इस्रा आयत 95 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह बनी इस्राईल (अल-इस्रा) - आयत 95

✅ इंसानों के लिए इंसान ही रसूल होने की हिकमत

अल्लाह तआला ने निहायत माकूल दलील दी: अगर ज़मीन पर बसने वाली मख़्लूक़ फ़रिश्ते होते, तो उनकी जिंस का फ़रिश्ता ही रसूल बनकर आता। लेकिन चूँकि ज़मीन पर इंसान आबाद हैं, इसलिए अल्लाह ने इंसान ही को रसूल बनाकर भेजा ताकि वे उनकी ज़बान, अहसासात और ज़िन्दगी के तकाज़ों को समझकर अमली मिसाल पेश कर सकें।

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