कुरान - 18:39 सूरह अल-कह्फ़ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

39
وَلَوۡلَآ إِذۡ دَخَلۡتَ جَنَّتَكَ قُلۡتَ مَا شَآءَ ٱللَّهُ لَا قُوَّةَ إِلَّا بِٱللَّهِۚ إِن تَرَنِ أَنَا۠ أَقَلَّ مِنكَ مَالٗا وَوَلَدٗا

Transliteration: (Wa law laaa iz dakhalta jannataka qulta maa shaaa'al laahu laa quwwata illaa billaah; in tarani ana aqalla minka maalanw wa waladaa)

'और जब तू अपने बाग़ में दाख़िल हुआ, तो तूने क्यों न कहा: 'माशा-अल्लाह! ला क़ुव्वता इल्ला बिल्लाह' (जो अल्लाह चाहे! अल्लाह के सिवा कोई ताक़त नहीं)? अगर तू मुझे माल और औलाद में अपने से कम देखता है,' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-कह्फ़ आयत 39 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अल-कहफ़ - आयत 39

✅ 'माशा-अल्लाह ला क़ुव्वता इल्ला बिल्लाह' - नेमत की हिफ़ाज़त का सुन्नती तरीक़ा

मोमिन ने उसे नसीहत की कि जब भी अपनी या किसी की नेमत, औलाद या माल को देखो, तो तकब्बुर करने के बजाय फ़ौरन 'माशा-अल्लाह ला क़ुव्वता इल्ला बिल्लाह' कहो ताकि अल्लाह का शुक्र अदा हो और नज़र-ए-बद से हिफ़ाज़त रहे। हर नेमत अल्लाह की अता है, इंसान की अपनी कोई कु़दरत नहीं।

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