कुरान - 18:42 सूरह अल-कह्फ़ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

42
وَأُحِيطَ بِثَمَرِهِۦ فَأَصۡبَحَ يُقَلِّبُ كَفَّيۡهِ عَلَىٰ مَآ أَنفَقَ فِيهَا وَهِيَ خَاوِيَةٌ عَلَىٰ عُرُوشِهَا وَيَقُولُ يَٰلَيۡتَنِي لَمۡ أُشۡرِكۡ بِرَبِّيٓ أَحَدٗا

Transliteration: (Wa uheeta bisamarihee faasbaha yuqallibu kaffaihi 'alaa maaa anfaqa feehaa wa hiya khaawiyatun 'alaa 'urooshihaa wa yaqoolu yaalaitanee lam ushrik bi Rabbeee ahadaa)

और उसके तमाम फलों (दौलत) को घेर लिया गया (तबाह कर दिया गया), तो वह उस पर जो उसने उसमें ख़र्च किया था अपने हाथ मलता (अफ़सोस करता) रह गया, और वह बाग़ अपनी छतों के बल गिरा पड़ा था, और वह कहने लगा, 'हाय अफ़सोस! काश मैंने अपने रब के साथ किसी को शरीक न ठहराया होता!' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-कह्फ़ आयत 42 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह अल-कहफ़ - आयत 42

✅ तकब्बुर का दर्दनाक अंजाम: हसरत और पछतावा

अल्लाह का अज़ाब उस बाग़ पर टूट पड़ा और पलक झपकते ही पूरा बाग़ राख का ढेर बन गया। जब वह सुबह आया तो देखा कि सब कुछ तबाह हो चुका है। अब वह अपने हाथ मलकर पछता रहा था और रोते हुए कह रहा था कि काश मैंने शिर्क और तकब्बुर न किया होता! लेकिन वक़्त गुज़र जाने के बाद का पछतावा किसी काम नहीं आता।

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