कुरान - 5:22 सूरह अल-मायदा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

22
قَالُواْ يَٰمُوسَىٰٓ إِنَّ فِيهَا قَوۡمٗا جَبَّارِينَ وَإِنَّا لَن نَّدۡخُلَهَا حَتَّىٰ يَخۡرُجُواْ مِنۡهَا فَإِن يَخۡرُجُواْ مِنۡهَا فَإِنَّا دَٰخِلُونَ

Transliteration: (Qaaloo yaa Moosaaa innaa feehaa qawman jabbaareena wa innaa lan nadkhulahaa hattaa yakhrujoo minhaa fa-iny yakhrujoo minhaa fa innaa daakhiloon)

उन्होंने कहा: ऐ मूसा! उस बस्ती में तो बहुत ज़बरदस्त लोग रहते हैं [84], और हम तो हरगिज़ वहाँ न जाएंगे जब तक वे वहाँ से निकल न जाएं [85], फिर अगर वे निकल जाएं तो हम ज़रूर दाख़िल होंगे। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-मायदा आयत 22 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-मायिदा – आयत 22 की तफ़्सीर

 

✅ [84] जब्बारीन — ताक़तवर और डरावने लोग

जब्बारीन नामक लोग निहायत ताक़तवर और क़दावर थे।

उनका जिस्म इतना बड़ा था कि एक बनी इस्राईली उनका एक जूता पहन सके, इतनी उनकी विशालता थी।

हज़रत मूसा عليه السلام ने बारह सरदार भेजे थे ताकि वह जाकर उनकी हालत देख सकें।

इनमें से दस सरदारों ने रिपोर्ट दी कि वह लोग बहुत ही ताक़तवर और भयानक हैं —
जिससे बनी इस्राईल में ख़ौफ़ और डर भर गया।

उन्होंने कहा: "उस बस्ती में तो ज़बरदस्त लोग रहते हैं" — यानी कि हम उनसे मुक़ाबला नहीं कर सकते।

✅ [85] अल्लाह के हुक्म की नाफ़रमानी

"जब तक वे निकल न जाएं" — इस जुमले से यह समझ आता है कि बनी इस्राईल को अल्लाह की तरफ़ से हुक्म दिया गया था कि वह बस्ती में दाख़िल हों।

लेकिन उनका कहना कि "हम तब जाएंगे जब वे निकल जाएंगे" — यह हुक्म की खुली नाफ़रमानी थी।

इस तसाद्दी (इन्कार) की वजह से उन्हें बाद में अल्लाह की तरफ़ से सज़ा भी मिली —
जिसमें चालीस साल तक का भटकाव और दूसरी सख़्त आज़माइशें शामिल थीं।

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