Transliteration: (Wa iz qaala Moosaa liqawmihee yaa qawmiz kuroo ni'matal laahi 'alaikum iz ja'ala feekum ambiyaaa'a wa ja'alakum mulookanw wa aataakum maa lam yu'ti ahadam minal 'aalameen)
इस आयत में हज़रत मूसा عليه السلام की एक तक़रीर का ज़िक्र है, जिसमें उन्होंने बनी इस्राईल को अल्लाह की ख़ास नेमतें याद दिलाईं।
इन नेमतों में से एक यह थी कि कई नबी उन्हीं की नस्ल से उठाए गए। इस तरह वह एक ऐसी क़ौम बनी जिसे अल्लाह ने रसूलों की सूरत में इज़्ज़त बख़्शी।
इससे यह बात साबित होती है कि:
किसी नबी की नस्ल से होना, जब ईमान के साथ हो, तो यह बेहद आला मुक़ाम है।
यही उसूल रसूल ﷺ के अहले बैत पर भी लागू होता है — उनका नसब और उनकी परहेज़गारी उन्हें रूहानी इज़्ज़त बख़्शती है।
बनी इस्राईल को भी यह शराफ़त हासिल थी क्योंकि वो हज़रत इब्राहीम عليه السلام, फिर इसहाक और याक़ूब की संतान थे।
"और तुमको बादशाह बनाया" — इस जुमले से ये बात मालूम होती है कि अल्लाह ने बनी इस्राईल को हुकूमत और इख़्तियार की नेमत भी अता की थी।
इसमें शामिल हैं:
इससे हमें यह सबक मिलता है:
जब बादशाही नबूवत या परहेज़गारी के साथ मिल जाए, तो यह अल्लाह की तरफ़ से एक बड़ी नेमत और क़ौमी इस्तिक़ाम का ज़रिया बनती है।
अगर इस तरह की इज़्ज़त को अल्लाह की इनायत समझा जाए, तो वह शुक्र और हिदायत का सबब बनती है, ना कि तकब्बुर का।
"और तुमको वह कुछ दिया जो दुनिया वालों में किसी को नहीं दिया" — इससे मुराद हैं वे यूनीक नेमतें, जो सिर्फ़ बनी इस्राईल को मिलीं, जैसे कि:
इससे यह सीख मिलती है कि:
अल्लाह की नेमतों को याद करना और दूसरों को याद दिलाना, यह अंभिया की सुन्नत है।
इस तरह की याददिहानी इंसान को शुक्रگزاری की तरफ़ लाती है और अल्लाह की इताअत और तवक्कुल की दावत देती है।
लेकिन जब नाक़द्री और नाफ़रमानी बढ़ी, तो यह नेमतें उनसे छीन ली गईं — और यह हर दौर की क़ौमों के लिए एक चेतावनी है।
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