कुरान - 5:24 सूरह अल-मायदा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

24
قَالُواْ يَٰمُوسَىٰٓ إِنَّا لَن نَّدۡخُلَهَآ أَبَدٗا مَّا دَامُواْ فِيهَا فَٱذۡهَبۡ أَنتَ وَرَبُّكَ فَقَٰتِلَآ إِنَّا هَٰهُنَا قَٰعِدُونَ

Transliteration: (Qaaloo yaa Moosaaa innaa lan nadkhulahaa abadam maa daamoo feehaa fazhab anta wa Rabbuka faqaatilaaa innaa haahunaa qaa'idoon)

उन्होंने कहा: "ऐ मूसा! जब तक वे लोग वहाँ मौजूद हैं, हम हरगिज़ वहाँ दाख़िल न होंगे। इसलिए तुम और तुम्हारा रब जाओ और दोनों [89] लड़ो, हम तो यहीं बैठे रहेंगे [90]।" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-मायदा आयत 24 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-मायिदा – आयत 24 की तफ़्सीर

 

✅ [89] औलिया की ताक़त को लेकर ग़लतफहमी

इस आयत से वर्तमान के कुछ वहाबी यह दलील लेते हैं कि
अगर औलिया के पास ताक़त होती, तो सेना भेजने की क्या ज़रूरत थी?
वो कहते हैं कि सिर्फ औलिया को भेज दो, वही सब कर देंगे।

यह सोच इस आयत की ग़लत तफ़्सीर है,
क्योंकि इसमें अल्लाह पर तवक्कुल के साथ-साथ
अमली कोशिश की अहमियत को नज़रअंदाज़ किया जाता है।

औलिया का वुजूद अल्लाह की मर्जी से होता है,
मगर ज़मीन पर अमल करना इंसान की ज़िम्मेदारी है।

✅ [90] सहाबा की वफ़ादारी और बानी इस्राईल की कमज़ोरी

इस आयत से यह साबित होता है कि
हज़रत मूसा عليه السلام के साथियों की कमज़ोरी और बेवफ़ाई,
हज़रत मुहम्मद ﷺ के सहाबा की वफ़ादारी के मुक़ाबले में बेहद कमतर थी।

बनी इस्राईल ने लड़ाई से इंकार कर दिया,
यह कहकर कि "तुम और तुम्हारा रब जाओ, हम तो बैठे रहेंगे"।

जबकि हज़रत मुहम्मद ﷺ के सहाबा ने
कठिन से कठिन हालात में भी उनका साथ नहीं छोड़ा।
उन्होंने जान, माल और सब कुछ कुरबान कर दिया,
मगर रसूल ﷺ से बेवफ़ाई नहीं की।

जैसे रसूलुल्लाह ﷺ तमाम अंबिया में अफज़ल हैं,
वैसे ही उनके सहाबा भी तमाम उम्मतों के सहाबा से अफज़ल हैं।

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