Transliteration: (Qaala Rabbi innee laaa amliku illaa nafsee wa akhee fafruq bainanaa wa bainal qawmil faasiqeen)
यहाँ "इख़्तियार" से मुराद है —
क़ब्ज़ा, असर, या हुकूमत —
ना कि किसी चीज़ का मालिक होना।
हज़रत मूसा عليه السلام कह रहे हैं कि
वो सिर्फ़ खुद और अपने भाई (हारून) पर असर डाल सकते हैं,
बाक़ी लोगों पर उनका कोई इख़्तियार नहीं।
यह आयत बताती है कि
बनी इस्राईल की नाफ़रमानी और ज़िद इतनी बढ़ गई थी,
कि उनके नबी तक मायूस हो गए।
इस आयत से हमें कई सबक़ मिलते हैं:
इससे साबित होता है कि नेक लोगों की मौजूदगी,
गुनहगारों के लिए भी रहमत बन जाती है।
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