कुरान - 5:40 सूरह अल-मायदा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

40
أَلَمۡ تَعۡلَمۡ أَنَّ ٱللَّهَ لَهُۥ مُلۡكُ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضِ يُعَذِّبُ مَن يَشَآءُ وَيَغۡفِرُ لِمَن يَشَآءُۗ وَٱللَّهُ عَلَىٰ كُلِّ شَيۡءٖ قَدِيرٞ

Transliteration: (Alam ta'lam annal laaha lahoo mulkus samaawaati wal ardi yu'az zibu many-yashaa'u wa yaghfiru limany-yashaaa'; wallaahu 'alaa kulli shai'in Qadeer)

क्या तुम नहीं जानते कि आसमानों और ज़मीन की बादशाही अल्लाह ही के लिए है? वह जिसे चाहे सज़ा देता है [126], और जिसे चाहे माफ़ कर देता है [127], और अल्लाह हर चीज़ पर क़ादिर है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-मायदा आयत 40 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-मायदा – आयत 40 की तफ़्सीर

 

✅ [126] अल्लाह की बादशाही और इख़्तियार

अल्लाह ही सारी कायनात का मालिक है — आसमानों और ज़मीन की तमाम हुकूमतें उसी के ताबे हैं। यह आयत मोमिनों को याद दिलाती है कि अल्लाह की क़ुदरत और इख़्तियार मुकम्मल है।
सज़ा देना उसी का हक़ है — वह जिसे चाहे अपने हिकमत और अद्ल के तहत अज़ाब देता है।
अगर कोई चोर सच्चे दिल से तौबा कर ले, तो अल्लाह उसे आख़िरत की सज़ा से बचा सकता है, हालाँकि दुनियावी सज़ा तब भी दी जा सकती है।

✅ [127] अल्लाह की माफ़ी और इंसाफ़

अल्लाह जिसे चाहे माफ़ करता है, जो उसकी रहमत और करम का इज़हार है।
"अल्लाह हर चीज़ पर क़ादिर है" — यह जुमला बताता है कि उसका हर फ़ैसला — चाहे वो माफ़ करना हो या सज़ा देना — वह हिकमत और मुकम्मल तवज्जोह से होता है।
इसमें कोई तज़ाद नहीं, क्यूँकि अल्लाह बिना वजह सज़ा नहीं देता, और उसका अद्ल बिल्कुल मुकम्मल और उसकी रहमत बेहद वसीअ (विस्तृत) है।

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