Transliteration: (Wa kaifa yuhakkimoonaka wa 'indahumut Tawraatu feehaa hukmul laahi summa yatawallawna mim ba'di zaalik; wa maaa ulaaa'ika bilmu'mineen)
इस आयत में अल्लाह तआला ने यहूद की मुनाफ़िक़त और दोगलेपन को बेनक़ाब किया है।
"तौरा उनके पास है जिसमें अल्लाह का हुक्म मौजूद है" — यानी जब उनकी अपनी किताब (तौरा) में हुक्म साफ़-साफ़ लिखा हुआ है, जैसे कि ज़िना (व्यभिचार) की सज़ा 'रज्म' (पत्थरों से मार कर क़त्ल) है, तो फिर वे तुम्हें (रसूल ﷺ) हाकिम क्यों बना रहे हैं?
इसका जवाब भी खुद आयत में है:
"फिर भी वे उससे मुँह मोड़ लेते हैं" — यानी तौरा में हुक्म जानने के बावजूद जब वह उनकी नफ़्सानी ख़्वाहिश के ख़िलाफ़ होता है, तो वे उसे मानने से इंकार कर देते हैं।
इस आयत का मफ़हूम यह है कि:
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