कुरान - 5:52 सूरह अल-मायदा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

52
فَتَرَى ٱلَّذِينَ فِي قُلُوبِهِم مَّرَضٞ يُسَٰرِعُونَ فِيهِمۡ يَقُولُونَ نَخۡشَىٰٓ أَن تُصِيبَنَا دَآئِرَةٞۚ فَعَسَى ٱللَّهُ أَن يَأۡتِيَ بِٱلۡفَتۡحِ أَوۡ أَمۡرٖ مِّنۡ عِندِهِۦ فَيُصۡبِحُواْ عَلَىٰ مَآ أَسَرُّواْ فِيٓ أَنفُسِهِمۡ نَٰدِمِينَ

Transliteration: (Fataral lazeena fee quloobihim maraduny yusaari'oona feehim yaqooloona nakhshaaa an tuseebanaa daaa'irah; fa'asallaahu ai yaatiya bilfathi aw amrim min 'indihee fa yusbihoo 'alaa maaa asarroo feee anfusihim naadimeen)

तुम देखोगे कुछ ऐसे लोग, जिनके दिलों में बीमारी है, वे यहूद और नसारा की तरफ़ दौड़ते हैं और कहते हैं: "हमें डर है कि हम पर कोई मुसीबत न आ जाए [167]।" तो बहुत मुमकिन है कि अल्लाह जल्द ही फत्ह या अपनी तरफ़ से कोई हुक्म भेज दे [168], फिर वे उस पर पछताएँगे जो अपने दिलों में छुपा रखा था [169]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह अल-मायदा आयत 52 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा अल-माइदा – आयत 52 की तफ़्सीर

 

✅ [167] दिल की बीमारी का मतलब

जिनके दिलों में बीमारी है — इससे मुराद वे लोग हैं जिनके दिलों में शक, डर और निफ़ाक़ मौजूद है। ये लोग यहूद व नसारा से रिश्ते इसलिए बनाए रखते हैं क्योंकि:

  • उन्हें डर है कि अगर इनसे रिश्ता तोड़ा, तो दुश्मनी की वजह से नुक़सान पहुँचेगा,
  • या फिर वो समझते हैं कि इस्लाम अभी कमज़ोर है, इसलिए दुनियावी फ़ायदे के लिए इनसे जुड़ाव ज़रूरी है।

✅ [168] अल्लाह की फत्ह या हुक्म का वादा

जल्द ही फत्ह या अपनी तरफ़ से कोई हुक्म भेज दे — इसका मतलब है कि अल्लाह मुसलमानों को जल्द ही ग़लबा अता करेगा, जैसे कि फ़त्ह मक्का। या फिर ऐसा हुक्म आएगा जिससे काफ़िर और मुशरिक हिजाज़ से निकाल दिए जाएँगे, जैसे कि यहूदियों को मदीना से निकाला गया।

✅ [169] छुपी हुई निफ़ाक़त पर पछतावा

फिर वे पछताएँगे जो अपने दिलों में छुपा रखा था — मुनाफ़िक़ीन अपने अंदरूनी कुफ़्र और बाहरी इस्लामी दावे के साथ दोहरे मापदंड अपनाते हैं। जब अल्लाह की मदद से इस्लाम को ग़लबा मिल जाता है, और मदीना सिर्फ मुसलमानों का गढ़ बन जाता है, तब वे अपनी छुपी हुई वफ़ादारियों पर अफ़सोस करेंगे। यह आयत ख़बरदार करती है कि हर तरफ़ से दोस्ती की कोशिश आख़िरकार रुसवाई और अफ़सोस का कारण बनती है।

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