Transliteration: (Fataral lazeena fee quloobihim maraduny yusaari'oona feehim yaqooloona nakhshaaa an tuseebanaa daaa'irah; fa'asallaahu ai yaatiya bilfathi aw amrim min 'indihee fa yusbihoo 'alaa maaa asarroo feee anfusihim naadimeen)
जिनके दिलों में बीमारी है — इससे मुराद वे लोग हैं जिनके दिलों में शक, डर और निफ़ाक़ मौजूद है। ये लोग यहूद व नसारा से रिश्ते इसलिए बनाए रखते हैं क्योंकि:
जल्द ही फत्ह या अपनी तरफ़ से कोई हुक्म भेज दे — इसका मतलब है कि अल्लाह मुसलमानों को जल्द ही ग़लबा अता करेगा, जैसे कि फ़त्ह मक्का। या फिर ऐसा हुक्म आएगा जिससे काफ़िर और मुशरिक हिजाज़ से निकाल दिए जाएँगे, जैसे कि यहूदियों को मदीना से निकाला गया।
फिर वे पछताएँगे जो अपने दिलों में छुपा रखा था — मुनाफ़िक़ीन अपने अंदरूनी कुफ़्र और बाहरी इस्लामी दावे के साथ दोहरे मापदंड अपनाते हैं। जब अल्लाह की मदद से इस्लाम को ग़लबा मिल जाता है, और मदीना सिर्फ मुसलमानों का गढ़ बन जाता है, तब वे अपनी छुपी हुई वफ़ादारियों पर अफ़सोस करेंगे। यह आयत ख़बरदार करती है कि हर तरफ़ से दोस्ती की कोशिश आख़िरकार रुसवाई और अफ़सोस का कारण बनती है।
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